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Auraiya News: दखनाई में 26 आवासीय पट्टे निरस्त, पांच आवंटियों का आवंटन बरकरार

Mon, 07 Sep 2026 12:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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औरैया। बिधूना तहसील के राजस्व गांव दखनाई में वर्ष 2010-11 में किए गए आवासीय भूमि आवंटन की जांच के बाद एडीएम अविनाश चंद्र मौर्य ने बड़ा फैसला सुनाया है। जांच में पांच आवंटी ही पात्र पाए गए हैं। पात्रों का आवास आवंटन यथावत रखा गया है, जबकि शेष के पक्ष में किए गए आवास आवंटन निरस्त कर दिए गए हैं। अपात्र आवंटियों की भूमि पहले की तरह ग्राम सभा के खाते में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
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12 जुलाई 2010 को भूमि प्रबंधक समिति दखनाई की ओर से किए गए 88 व्यक्तियों के आवास आवंटन से जुड़ा है। इसमें 17 अनुसूचित जाति और 71 पिछड़ी जाति के आवंटी थे। एसडीएम बिधूना की जांच के बाद 28 फरवरी 2011 को आवंटियों को पात्र मानते हुए आवंटन स्वीकृत किया गया था। बाद में तत्कालीन पीठासीन अधिकारी ने 28 अक्तूबर 2016 को सभी पट्टेदारों के आवंटन निरस्त कर दिए थे।
इसके खिलाफ कई आवंटियों ने अपर आयुक्त प्रशासन, कानपुर मंडल के यहां निगरानी दाखिल की थी। अपर आयुक्त कानपुर मंडल ने 16 अगस्त 2024 को निगरानी स्वीकार करते हुए संबंधित आवंटियों के संबंध में पूर्व आदेश निरस्त कर मामले को गुणदोष के आधार पर नए सिरे से निस्तारित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद बिधूना एसडीएम से दोबारा जांच कराई गई। 20 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट में आवंटित जमीन के अभिलेख, आवंटियों की भूमि, मकान, कब्जे और पात्रता की स्थिति का परीक्षण किया गया।
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जांच में गांव निवासी बृजपाल, भुवनेश कुमार, बारेलाल, बनवारीलाल और रामबाबू को पात्र पाया गया। इनमें कुछ आवंटी अनुसूचित जाति के हैं। रिपोर्ट में इनके पास पर्याप्त आवासीय भूमि न होने की स्थिति दर्ज की गई। साथ ही आदेश में कहा गया कि अनुसूचित जाति के आवंटियों पर तीन वर्ष के भीतर मकान बनाने की समय सीमा लागू नहीं होती। एडीएम अविनाश चंद्र मौर्या की कोर्ट ने बाकी बचे 26 आवंटियों का आवंटन निरस्त करने का आदेश दिया है। आवासीय पट्टे की इन जमीनों को ग्राम सभा में दर्ज करने का आदेश दिया है।

राजस्व मानकों का आदेश में रखा गया ख्याल
एडीएम कोर्ट के आदेश में उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 की धारा 122-ग का हवाला देते हुए कहा गया कि आवासीय स्थल पाने वाले व्यक्ति को तीन वर्ष के भीतर कच्चा या पक्का मकान बनाकर उसमें निवास करना होता है। ऐसा न करने पर भूमि पर उसका अधिकार समाप्त हो जाता है और भूमि किसी अन्य व्यक्ति को पुन: आवंटित की जा सकती है। हालांकि अनुसूचित जाति या अनुसूचित आदिम जाति के लिए यह तीन वर्ष की समय सीमा लागू नहीं होती। इस मानक के तहत अनुसूचित जाति के बृजपाल, भुवनेश कुमार, बारेलाल, बनवारीलाल और रामबाबू के पक्ष में फैसला चला गया। आवास आवंटन यथावत रखने का निर्णय लिया गया। शेष आवंटियों के पक्ष में किए गए आवास आवंटन निरस्त कर दिए गए हैं।

कुछ के पास पहले से थे मकान, हाथ से निकल गया पट्टा
दखनाई निवासी जसवंत सिंह, रामप्रकाश, मनोज कुमार, रामबहादुर, अशोक कुमार, विनोद कुमार, लालू, छक्कीलाल, गंगाचरन, अरविंद कुमार, दिनेश कुमार, जवान सिंह, अवधेश कुमार, उदय सिंह, सुरेश चंद्र, राजेश कुमार, विजय कुमार, रामप्रसाद, शंभूदयाल, सर्वेश, गोरेलाल, श्रीकृष्ण, रामऔतार और रामचंद्र समेत अन्य आवंटी जांच में अपात्र पाए गए। कई मामलों में आवंटियों के पास पहले से पर्याप्त आवासीय भूमि या मकान होना व आवंटित भूमि पर कब्जा अथवा निर्माण न होना प्रमुख आधार रहा।
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