काका हाथरसी कार्यक्रम में शिरकत करते अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी का अलीगढ़ से गहरा नाता था। यहां के लोग उन्हें कभी नहीं भूल पाएंगे। उनकी मृत्यु की खबर सुनकर उनके प्रशंसकों का मन रो रहा है। पूर्व सांसद शीला गौतम एवं उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार राज्य परामर्शदात्री समिति के अध्यक्ष ठाकुर रघुराज सिंह सहित कई लोगों को वह व्यक्तिगत रूप से जानते थे। वह करीब 10 बार या उससे अलीगढ़ आए हैं। एक बार एमएलसी नेम सिंह चौहान के घर पर रुके थे। वर्ष 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी नुमाइश मैदान में भाजपा प्रत्याशी शीला गौतम के चुनाव प्रचार के सिलसिले में आए थे। उस समय वह प्रधानमंत्री भी थे। सभा की अध्यक्षता तत्कालीन जिलाध्यक्ष ठाकुर रघुराज सिंह ने की थी।
विमान में गड़बड़ी के कारण अटल बिहारी करीब दो घंटे विलंब से पहुंचे थे। नेताओं ने कहा कि इनका इंतजार कर रहे प्रशंसकों को रघुराज सिंह ने भाषण देकर बांधे रखा। तब अटल ने रघुराज को कहा था कि बड़ा नेता बनोगे। रघुराज सिंह ने बताया कि इस सभा में कल्याण सिंह भी शामिल हुए थे। सभा के तीन दिन पहले ही कल्याण सिंह की भाजपा में पुन: वापसी हुई थी। रघुराज सिंह का कहना है कि 2004 के बाद अटल बिहारी वाजपेयी अलीगढ़ नहीं आए। 1999 में भी उन्होंने नुमाइश मैदान में चुनावी सभा को संबोधित किया था। उस समय भी शीला गौतम भाजपा प्रत्याशी थी। नगर विधायक संजीव राजा कहते है कि 1984 में अटल बिहारी छर्रा में एक सभा को संबोधित करने पहुंचे थे। उनके साथ राजमाता विजय राजे सिंधिया भी थी। कार से वे लोग छर्रा जा रहे थे। उस समय एसवी कॉलेज के पास ओवर ब्रीज नहीं बना था। रेलवे क्रासिंग बंद होने के कारण अटल जी को काफी देर वहां रुकना पड़ा था। उन्होंने अपने निराले अंदाज में चुटकी ली थी कि सरकार नहीं चाहती कि वह सभा करने जाए। इसलिए रेलवे क्रासिंग बंद करवा दी है। अटल बिहारी वाजपेयी की नाजुक हालत का समाचार सुनकर ठाकुर रघुराज सिंह लखनऊ से दिल्ली रवाना हो गए हैं।
यूपी का मामला है, कल्याण से मिलो
भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुनील पांडेय 1993 में खैर विधानसभा से चुनाव टिकट मांगने अटल बिहारी वाजपेयी के पास गए थे। 1992 में वह खैर मंडी समिति का सदस्य रह चुके थे। अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे पूछा था कि कल्याण सिंह से मिले या नहीं। सुनील पांडेय ने बताया कि मिला था लेकिन वह कह रहे हैं कि खैर से किसी जाट को लड़ाऊंगा। तब अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि यूपी का मामला है। कल्याण सिंह से ही बात करों। सुनील पांडेय ने बताया कि वह जिंदादिल इंसान थे। पूरी ताकत से जोर से निश्चल हंसी हंसते थे। एक बार हाथरस में कवि सम्मेलन में आए थे। तब वे लोग खैर से किराये पर वाहन लेकर उनको सुनने गए थे।
काका हाथरसी कार्यक्रम में शिरकत करते अटल बिहारी वाजपेयी
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने 1957 में युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी की जमानत जब्त करायी थी। 1957 के लोकसभा चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी मथुरा सहित तीन स्थानों से चुनाव लड़े थे। मथुरा के निर्दलीय प्रत्याशी राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने उनकी जमानत जब्त करा दी थी। राजा महेंद्र प्रताप सिंह सर सैयद द्वारा स्थापित एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज (एमएओ) के छात्र रहे थे, जो बाद में यूनिवर्सिटी बनकर एएमयू के रूप में विख्यात हुआ।
एएमयू उर्दू एकेडमी के डायरेक्टर एवं एएमयू के पूर्व पीआरओ डॉ. राहत अबरार ने बताया कि एएमयू कुलपति महमूद उर रहमान के जमाने में अटल बिहारी वाजपेयी ने जाकिर हुसैन पर लिखित पुस्तक का विमोचन किया था। बाद में महमूद उर रहमान ने अटल हिमायत कमेटी भी बनाई थी और एएमयू के कई शिक्षक उससे जुड़े थे।
डॉ. राहत अबरार, डायरेक्टर, एएमयू उर्दू अकादमी कहते हैं कि, युवाओं में अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण का जबर्दस्त क्रेज था। उनका भाषण सुनने सभी जाति एवं धर्म के लोग जाते थे। एक बार कंपनीबाग में उनकी सभा हुई थी। वह भी उनका भाषण सुनने गए थे। वह बहुत अच्छा वक्ता थे। उनके भाषण का जवाब नहीं था।
हाथरस की रबड़ी खाते अटल बिहारी वाजपेयी
भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की खबर सुनते ही पूर्व पालिकाध्यक्ष रमेशचंद्र आर्य और उनका परिवार बेहद उदास हो गया। रमेशचंद्र की कई अहम यादें अटल के साथ जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी जब 1994 में काका हाथरसी पुरस्कार समारोह में आए थे तो शहर में उनका भव्य अभिनंदन हुआ था। पूर्व पीएम वाजपेयी ने उनके निवास पर ही विश्राम किया और भोजन किया। भोजन में उन्हें हाथरस की रबड़ी बेहद पसंद आई थी। रबड़ी की उन्होंने काफी तारीफ भी की थी।
अटल नेकविताएं सुना सभी को कर दिया था भाव-विभोर
भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कवि के रूप में 1994 में हाथरस आए थे। 1994 में काका हाथरसी पुरस्कार समारोह में वह मुख्य अतिथि के रूप में आए और डॉ. राकेश शरद और भगवतशरण शर्मा को काका हाथरसी पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्होंने श्रोताओं के आग्रह पर एक नहीं, बल्कि तीन कविताएं भी सुनाई थीं। उनकी कविताओं को सुनकर सभी भाव-विभोर हो गए थे।
उस समय उन्होंने यह कविताएं समारोह में सुनाई थी...
गीत नहीं गाता हूं, गीत नहीं गाता हूं-
बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं,
टूटता तिलस्म आज सच से भय खाता हूं।
गीत नया गाता हूं, गीत नया गाता हूं।
टूटे हुए तारों से, फूटे वासंती स्वर,
पत्थर की छाती पर उग आया नव अंकुर।
झरे सब पीले पात, कोयल की कुहुकरात,
प्राची में अरुणिमा की रेख, देख पाता हूं।
गीत नहीं गाता हूं, गीत नहीं गाता हूं-