नोएडा के आरुषि-हेमराज मर्डर केस में ट्रायल का सामना कर रहे डा. राजेश तलवार को हाईकोर्ट से थोड़ी राहत मिली है।
सीबीआई कोर्ट के समक्ष वैज्ञानिक जांच की रिपोर्ट और कुछ गवाहों को प्रस्तुत करने की उनकी मांग आंशिक तौर पर स्वीकार कर ली गई है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद के 18 जून 2013 के आदेश को कुछ अंश तक संशोधित कर दिया है।
न्यायालय ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह साउंड सिम्युलेशन टेस्ट की रिपोर्ट, डा. तलवार के दो मोबाइल नंबरों और क्लीनिक के लैंड लाइंन नंबर की कॉल डिटेल और डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट साक्ष्य के तौर पर सीबीआई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे।
इसी प्रकार से गवाहों को समन करने के मामले में कोर्ट ने डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट को बचाव पक्ष की ओर से परीक्षित कराने के लिए दूसरे विशेषज्ञ की सलाह लेने की मांग को स्वीकार कर लिया है।
कोर्ट ने दो मोबाइल फोन कंपनियों के अधिकारियों को समन करने की मांग भी स्वीकार कर ली है।
डा. तलवार की ओर से सीबीआई के पूर्व अधिकारी अरुण कुमार को समन करने, सुप्रीम कोर्ट से उनकी पुनर्विचार याचिका की मूल प्रति समन करने सहित अन्य सभी मांगें नामंजूर कर दी गई हैं।
अपने विस्तृत आदेश में न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कहा है कि दोहरे हत्याकांड का ट्रायल त्वरित गति से पूरा किया जाए मगर इस बात का ध्यान रखा जाए कि जल्दबाजी के कारण बचाव पक्ष के अधिकारों का अतिक्रमण न हो।
निष्पक्ष ट्रायल बचाव पक्ष का संवैधानिक अधिकार है। इस संवैधानिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कानून में पूरी प्रक्रिया वर्णित है। आपराधिक विचारण में अपराध को साबित करने का भार अभियोजन पर होता है। जब तक अपराध साबित न हो जाए आरोपी निर्दोष माना जाएगा।
डा. राजेश तलवार ने सीबीआई कोर्ट के 18 जून के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सीबीआई कोर्ट ने दोहरे हत्याकांड में संदिग्धों के ब्रेन मैपिंग, नार्को एनालिसिस और लाई डिटेक्टर टेस्ट की रिपोर्ट, डीएनए टेस्ट रिपोर्ट तथा कई गवाहों को समन करने की मांग की थी।
बचाव पक्ष की दलील थी कि यह दस्तावेज आरोपियों की बेगुनाही साबित करने और घटना में किसी तीसरे का हाथ होने की पुष्टि करने के लिए आवश्यक हैं।