आरुषि-हेमराज मर्डर केस में शुक्रवार को गाजियाबाद कोर्ट में डिफेंस के गवाह विकास सेठी से अभियोजन की जिरह पूरी हो गई।
अभियोजन के एक सवाल पर गवाह का कहना था कि यह बात पूरी तरह से गलत है कि उसने ही हेमराज का मोबाइल पंजाब भिजवाया हो।
पंजाब में उसकी बुआ रहती हैं, मगर वह वर्ष 2012 में ही उनके पास गया था। इससे पहले वह कभी पंजाब नहीं गया। मामले की सुनवाई के लिए विशेष न्यायाधीश एस. लाल ने अब 22 जुलाई की तारीख तय की है।
गवाह का कहना था कि 1998 में वह वीडियो पाइरेसी के केस में गिरफ्तार हुआ था। थाना विकासपुरी नई दिल्ली ने उसे जेल भेजा था। वह चार दिन तक तिहाड़ जेल में बंद रहा था।
गवाह ने बताया कि उस केस में उसने अपना जुर्म कबूला था। इसके बाद एसीएमएम पीके गोयल ने उसे परवीक्षा में छोड़ने का आदेश दिया था।
यह कहना गलत है कि उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि को देखते हुए ही तलवार दंपति ने उसे इसलिए बुलाया हो कि वह घर की साफ-सफाई करके साक्ष्य मिटा दे।
सीबीआई लोक अभियोजक बीके सिंह और आरके सैनी के सवाल पर गवाह का कहना था कि आरुषि की लाश को अंतिम संस्कार के लिए लेकर जाने के बाद उसने तीन अन्य लोगों की मदद से उसका गद्दा और बर्फ की सिल्लियां पड़ोसी टंडन की छत पर डाल दिया था।
आरुषि के बेड के सिरहाने की दीवार पर खून के छींटे थे और बेड के नीचे वुडन फ्लोर पर भी खून था। दीवार पर लगे खून को हम लोगों ने साफ नहीं किया था, सिर्फ वुडन पर लगे खून को साफ किया था।
सफाई हमने घर की ही एक महिला के कहने पर की थी। यह कहना गलत है कि सफाई से पहले हमने पुलिसवालों से पूछा न हो। यह कहना भी गलत है कि वह मुल्जिमान के घर सीन ऑफ क्राइम को डिस्टर्ब करने के इरादे से गया था।