एक तरफ पूरा देश सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री के सुलझने की चर्चा कर रहा है। वहीं आरुषि और हेमराज की याद में जलवायु विहार के पार्क में लगाए गए नीम के पेड़ दिन पर दिन फल फूल रहे हैं। साढ़े पांच साल में दोनों पौधों ने पेड़ की शक्ल अख्तियार कर ली है।
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आरुषि और हेमराज की हत्या के बाद 28 मई 2008 को जलवायु विहार में राजकीय डिग्री कॉलेज की तरफ से पौधा रोपण किया गया था। इसमें नीम के पौधे लगाकर दोनों को श्रद्धांजलि दी गई। आज साढ़े पांच साल बाद दोनों पेड़ काफी बड़े हो चुके हैं।
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आरुषि के नाम से लगाया गया नीम का वृक्ष लड़कियों की तरह दुबला-पतला है, लेकिन यह काफी मजबूत है। वहीं, हेमराज नाम का पेड़ अपने हिसाब से काफी हरा-भरा दिखाई पड़ा। सेक्टर के पार्क में लगाए गए इन पेड़ों की रखवाली के लिए माली भी है।
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सभी पेड़ों के साथ इनकी देखभाल भी समय पर होती है। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें अतिरिक्त पानी भी मिलता है। साथ ही पेड़ों की सुरक्षा के लिए लोहे की जाली भी लगाई गई है, जिससे इन्हें बढ़ने में दिक्कत न आए।