सैन्य इस्तेमाल के लिए वितरित होने वाले पेट्रो पदार्थों की बाजार में धड़ल्ले से कालाबाजारी हो रही है। यूनिट के जवान चंद रुपयों के लालच में औने-पौने दाम पर हर महीने हजारों लीटर तेल बेच रहे हैं।
छावनी क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक सैन्य यूनिट हैं। यूनिटों में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति के लिए 15 से 16 कर्ब साइट पंप (पेट्रोल पंप को सेना में कर्ब साइट पंप कहते हैं) बनाए गए हैं। इन कर्ब साइट पंप पर यूनिट के डिमांड के आधार पर इंडियन ऑयल से टैंकर के माध्यम से आपूर्ति की जाती है।
डिमांड पर पहुंचने वाले टैंकर को कर्ब साइट पंप में फिल कर सील किया जाता है। जिसके बाद कर्ब साइट से यूनिट के वाहनों को समय-समय पर जरूरत के हिसाब से पेट्रोल-डीजल वितरित किया जाता है।
डीजल-पेट्रोल के खर्च का ब्योरा रखने के लिए हर वाहन में एक कॉल डायरी होती है। जिसमें वाहन चालक को वाहन के एवरेज के हिसाब से एक स्थान से दूसरे स्थान की दूरी के साथ पेट्रो पदार्थ के खर्च का ब्योरा दर्ज करना होता है।
ऐसे होता है खेल
अफसर जीप, अशोक लेलैंड और बड़े वाहनों के लिए दिए जाने वाले पेट्रोल-डीजल में से जवान बड़ी मात्रा में तेल चोरी कर एक कैन में रख लेते हैं। जब कई कैन भर जाती हैं, तो उन्हें अफसरों के वाहन में रखकर बाजार में बेच दिया जाता है। क्योंकि अफसरों के वाहन की जांच भी नहीं होती है। पेट्रोल से अधिक कालाबाजारी डीजल की होती है।
कम दाम पर बेचते हैं
बाजार में अब पेट्रोल 73 रुपये के आसपास मिल रहा है, जबकि सेना के जवान इसे 55 से 60 रुपये में बेच रहे हैं। वहीं 50 रुपये प्रति लीटर डीजल को 35 से 40 रुपये में बेच रहे हैं।
इन क्षेत्रों में बेचा जाता है तेल
लालकुर्ती, सदर बाजार, रजबन, सिटी रेलवे स्टेशन रोड, दिल्ली रोड, सोतीगंज, कंकरखेड़ा, ट्रांसपोर्ट नगर समेत कई इलाकों में सेना के इस्तेमाल के लिए दिए जाने तेल को बेचा जाता है।
पश्चिम यूपी सब एरिया कमांडर मेजर जनरल वीके यादव का कहना है कि सैन्य इस्तेमाल के पेट्रोल-डीजल को बाजार में बेचना बड़ा अपराध है। मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।