तिगरी मेले में गंगा घाट पर स्नान करते श्रद्धालु।
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तिगरी धाम। कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले ऐतिहासिक तिगरी गंगा मेला महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल जैसा दर्जा प्राप्त करता हैै। यह तिगरी धाम मेला आस्था, पर्यटन और मनोरंजन का अद्भुत संगम है। लोग धार्मिक श्रद्धा भाव सहित कई संस्कार संपन्न कराने पहुंचते हैं। युवक-युवतियां मनोरंजन और आनंद लेते हैं। बच्चे खानपान की चीजों, पानी और रेत में क्रीड़ा करने और खेल तमाशों की लालसा उन्हें खींच लाती है। सोमवार की देर रात तक करीब 11 लाख श्रद्धालु मेले में पहुंच चुके हैं। जबकि आने का सिलसिला कार्तिक पूर्णिमा के मुख्य स्नान तक चलता रहेगा।
तिगरी धाम गंगा मेला भारतीय सांस्कृतिक का धार्मिक महत्व रखता है। प्रति वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का महत्व पुराणों सहित सभी धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है। जन्म से मृत्यु तक हिंदु धर्म के अधिकांश संस्कार गंगा के सहारे संपन्न होते हैं। श्रद्धालु मृत्यु को प्राप्त कर चुके अपने परिजनों की सदगति और मुक्ति के लिए गंगा की शरण लेने आते हैं, जिसका क्रम सोमवार को भी जारी है।
कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान करने वालों की भारी संख्या होती हैं। दूसरी पूर्णिमा से इस कर्मकांड के लिए कार्तिक पूर्णिमा अधिक फलदायी मानी गई है। मां गंगा के आंचल में नवजात शिशुओं का मुंडन, नवविवाहित का स्नान और संतान प्राप्ति की कामना, बिगड़े काम बनने जैसी कितनी मिन्नतें संबंधित कर्मकांड यहां संपन्न कराते हैं।
हिंदु धर्म की मान्यताओं में मानव का अंतिम संस्कार गंगा नदी के तट पर करके उसकी राख और अस्थियां गंगा में प्रभावित करने से उसे स्वर्ग धाम प्राप्त होता है। यही कारण है कि शवों को गंगा तट पर अंतिम संस्कार को लाया जाता है। इतना ही नहीं मेले से हजारों परिवारों का रोजगार भी जुड़ा है। आम जरूरत की चीजों से लेकर मनोरंजन और आभूषण आदि के व्यवसायी यहां दुकानें लगाती हैं। सदियों से तिगरी का गंगा तट लाखों लोगों की श्रद्धा, मनोरंजन, पर्यटन और रोजगार का केंद्र बना है।