जिले की महिलाएं वाहन खरीदने में तो काफी आगे हैं, लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में पीछे हैं। एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत 3.20 लाख में से 20 प्रतिशत वाहन महिलाओं के नाम पर दर्ज हैं, जबकि ड्राइविंग लाइसेंस केवल 4575 महिलाओं ने बनवाया है।
सड़कों पर महिलाएं कार और दोपहिया पर फर्राटा भरती खूब दिखाई दे जाएंगी, लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में बहुत पीछे हैं। हर साल पंजीकृत होने वाली लगभग 20 फीसदी गाड़ियां महिलाओं के नाम दर्ज हैं। लेकिन, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाली महिलाओं की संख्या करीब सात फीसदी ही है। हर साल करीब 25 से 30 हजार ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाते हैं। इनमें भारी वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस शामिल नहीं हैं।
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में अमरोहा की महिलाएं पुरुषों के मुकाबले बहुत पीछे हैं। आरटीओ के रिकॉर्ड के मुताबिक 3.20 लाख वाहन पंजीकृत हैं। इसके करीब 64 हजार वाहन महिलाओं के नाम पर दर्ज है। जबकि 3.20 लाख वाहन पुरुषों के नाम पर रजिस्टर्ड हैं। इसके सापेक्ष 336872 पुरुषों ने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया है। वहीं, 64 हजार वाहन मालिक महिलाओं में से केवल 4575 ने ही ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया है। ये संख्या पंजीकृत वाहनों के सापेक्ष काफी कम है।
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एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत वाहनों की स्थिति
वाहन संख्या
बाइक/स्कूटी 257123
मोपेड/विक्की-4606
कार30740
ट्रैक्टर-11767
क्रेन55
मालवाह वाहन-5159
बस-576
स्कूली वाहन148
एंबुलेंस-312
पांच हजार रुपये होता है जुर्माना
टीएसआई धर्मेंद्र खोखर ने बताया कि बगैर ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने पर अधिकतम पांच हजार रुपये का जुर्माना होता है। यदि चालक के पास डीएल नहीं है तो दुर्घटना होने की स्थिति में बीमा क्लेम नहीं मिलता।
महिलाओं के नाम वाहन भले ही पंजीकृत हों, लेकिन उनके लाइसेंस की संख्या कम है। छात्राएं और कामकाजी महिलाएं ही लाइसेंस बनवाने पर ध्यान देती हैं। महिलाओं में जागरूकता लाने की जरूरत है।- महेश शर्मा, एआरटीओ प्रवर्तन
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