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संवैधानिक दायरे में अधिकारों की लड़ाई रखेंगे जारी : अफ्फान मंसूरपुरी

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अमरोहा। जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश की मजलिस-ए-मुंतजिमा का अधिवेशन बृहस्पतिवार को मदरसा इस्लामिया अरबिया जामा मस्जिद में हुआ। अधिवेशन की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष मुफ्ती सैयद मुहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने की। अध्यक्षीय संबोधन में मुफ्ती अफ्फान मंसूरपुरी ने कहा कि अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक और लोकतांत्रिक दायरे में शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखा जाएगा। नफरत का जवाब भाईचारे और संवाद से देने पर जोर दिया।
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प्रदेश महासचिव मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह कासमी ने सचिवीय रिपोर्ट पेश की। अधिवेशन में 15 प्रस्ताव पारित हुए। इनमें 1991 के पूजा स्थल अधिनियम, मदरसों के अधिकार, वक्फ कानून, मुस्लिम पर्सनल लॉ, सामाजिक सुधार और अल्पसंख्यक मुद्दे शामिल रहे। आसान निकाह, सामाजिक बुराइयों की रोकथाम, हस्तशिल्प संरक्षण, युवाओं के रोजगार और आपदा राहत पर भी प्रस्ताव पारित हुए। फिलिस्तीन-गाजा की स्थिति पर चिंता जताते हुए स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की मांग की गई।
अधिवेशन की शुरुआत ध्वजारोहण और कुरान की तिलावत से हुई। संचालन मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह कासमी और मुफ्ती जफर अहमद कासमी ने किया। अंत में मौलाना अब्दुर्रहमान कासमी की दुआ के साथ अधिवेशन संपन्न हुआ।
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ये प्रमुख लोग रहे मौजूद
अधिवेशन में प्रांतीय उपाध्यक्ष प्रोफेसर सैयद मुहम्मद नोमान, उपाध्यक्ष मुफ्ती मुहम्मद बिनयामीन कासमी, मुफ्ती रियासत अली कासमी, पश्चिमी जोन के महासचिव कारी मुहम्मद यामीन, पूर्वी जोन के महासचिव मुफ्ती जमीलुर्रहमान कासमी, हाफिज उबैदुल्लाह बनारसी, मौलाना इफ्तिखारुल हसन हापुड़, मौलाना हुसैन अहमद मदनी, मुफ्ती अबूबक्र सिद्दीक मंसूरपुरी, मौलाना अलाउद्दीन कासमी, हाफिज सईद अख्तर नूरी, हाफिज मुहम्मद फुरकान असअदी, कारी अब्दुल मुईद चौधरी, मौलाना मुहम्मद मूसा कासमी, मौलाना अब्दुर्रब कासमी, मौलाना मुहम्मद ताहिर, मौलाना अब्दुल जब्बार कासमी, मुफ्ती शमसुद्दीन बिजनौरी, मौलाना जहीरुल इस्लाम, मुफ्ती कासिम रजी कासमी और मुफ्ती ओवैस अकरम बिजनौरी मौजूद रहे।

इस्राइल को हथियारों की आपूर्ति रोकने की मांग
अधिवेशन में वैश्विक परिस्थितियों और फिलिस्तीन-गाजा के मुद्दे पर भी प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें गाजा और फलिस्तीन में जारी हिंसा को लेकर चिंता जताई गई। जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश ने मस्जिद अल-अक्सा की सुरक्षा और स्वतंत्र फलिस्तीनी राज्य की स्थापना की मांग की। साथ ही भारत सरकार से इस्राइल को हथियारों की आपूर्ति तत्काल रोकने का आग्रह किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि फलिस्तीन के लोगों के अधिकारों और वहां की मानवीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए भारत को अपनी भूमिका पर विचार करना चाहिए। अधिवेशन में इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और मानवाधिकारों से जोड़ते हुए चर्चा की गई।
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