मोहल्ला कुरैशी में हसन जिया सिद्दीक के आवास पर बुधवार सुबह आयोजित मुशायरे की शुरुआत अबरार हादी ने तिलावते कलाम-ए-पाक से की। मंचासीन जुनैद अकरम फारूकी, महमूद उल हादी, हाजी खुर्शीद अनवर रहे। साजिद अमरोहवी ने पढ़ा, तुझको खबर तो होगी सबा यारेगार की, खुशबू उड़ा के ला तू जरा यारेगार की। जुनैद अकरम ने पढ़ा, अल्लाह की रजा है सना यारेगार की, सरकार की सना है सना यारेगार की। शीबान कादरी ने ऐसे पढ़ा, जहां है रहमते आलम वही सिद्दीके अकबर हैं, जो दर है सरवरे दीं का वही है आस्तां उनका।
इसके अलावा जुबैर इब्ने सैफी, हसन जिया, डॉ. नासिर अमरोहवी, साद अमरोहवी, शहाब अनवर, अहमद रजा फराज आदि शायरों ने भी अपने कलाम पेश किए। अध्यक्षता मिर्जा साजिद अमरोहवी व संचालन शीबान कादरी ने किया। इस दौरान अली इमाम रिजवी, खालिद सिददीकी, उवैस मुस्तफा रिजवी, डाॅ. ताबिश मौजूद रहे। कन्वीनर हसन जिया ने सभी का शुक्रिया किया। मंगलवार रात मोहल्ला कुरैशी स्थित सिद्दीक-ए-अकबर हॉल में भी मनकबती मुशायरे का आयोजन किया गया।
भमोरा। फाईल फोटो अंजली- फोटो : mathura