अमरोहा। एमएसएमई के तहत सरकार लघु उद्योगों को भले ही बढ़ावा दे रही है, लेकिन कभी अमरोहा की पहचान रहा हैंडलूम कारोबार आज सुविधाओं के अभाव में पिछड़ रहा है। इससे जुड़े कारोबारी सरकार से फिर पहले सी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। शनिवार को हैंडलूम कारोबारियों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डिप्टी कलक्टर को साैंपा। जिसमें उन्होंने सरकार से फिर सुविधाएं को बढ़ाने की मांग की है।
पुराने समय की हैंडलूम से हुआ करती थी। बड़ी संख्या में जिले में इससे लोग जुड़े थे। यह कारोबार ही उनकी आय का जरिया हुआ करता था। हैंडलूम के बने उत्पाद आज भी देश-विदेश में पसंद किए जाते हैं, लेकिन सुविधाओं में अभाव मे हैंडलूम के हुनरमंद संघर्ष से जूझने के लिए विवश हैं। पुराने समय में मिलने वाली सुविधाएं सरकार ने धीरे-धीरे खत्म कर दीं। जिससे कारोबार को बचाए रखना भी मुश्किल हो गया है।
उत्पाद तैयार करने के लिए मिलने वाले धागे के लिए भी दूसरे राज्यों पर निर्भर होना पड़ रहा है। जबकि पहले अमरोहा में बनी सहकारी सूत कताई मिल से ही यह धागा मुहैया हुआ करता था, लेकिन अब वह मिल भी बंद हो गई है। इसके अलावा बाजार की कमी और दूसरी अन्य सुविधाओं से भी सरकार ने हाथ खींच लिए। जिस कारण इस कारोबार से जुड़े लोगों का मोहभंग होना शुरू हो गया ओर धीरे-धीरे यह कारोबार भी सिमटता चला गया। यहीं वजह है कि पहले जहां कभी 500 से अधिक इकाइयां जिले में संचालित हो रहीं थीं। वहीं अब लगभग 30 इकाईयां ही संचालित हो रही हैं।
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मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा
हैडलूम कारोबारियों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए शनिवार को ऑल इंडिया मोमिन कॉन्फ्रेंस की और से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डिप्टी कलक्टर ब्रजपाल सिंह को सौंपा। ज्ञापन में कहा कि पुराने समय में अमरोहा में बनी बेडशीट देशभर में प्रसिद्ध थी। यहां के दस्तकारों ने अपने हुनर के दम पर कई नेशनल एवार्ड भी जीते, लेकिन मौजूदा दौर में बुनकरों का व्यवसाय विलुप्त होता जा रहा है। जिसके चलते यहां से करीब 10 हजार बुनकर पलायन करने को मजबूर हो गए। आज भी भदोही, आगरा, सूरत, पानीपत जैसी जगहों पर यहां के बुनकर अपनी रोजी रोटी कमा रहे हैं या फिर इस काम को छोड़कर मजदूरी या ठेला आदि लगाने को मजबूर हो गए हैं। ज्ञापन देने वालों में कॉन्फ्रेंस के प्रदेश अध्यक्ष हसन आरिफ अंसारी, प्रदेश महासचिव परवेज आरिफ टीटू, फरमान अंसारी आदि शामिल रहे।
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यह रखी मांगे-
- बुनकरों को बाजार मुहैया कराया जाए।
- एनएचडीसी द्वारा सब्सिडाइज्ड धागे की आपूर्ति की जाए।
- बुनकरों के उत्थान के लिए बनाए गए सभी निगमों को फिर से चालू किया जाए।
- विपणन सहायता दी जाए।
- सहकारी समितियों को पुर्नजीवित किया जाए।
- आकाश द्वारा बुनकरों का माल डायरेक्ट खरीदा जाए।