छोटे-छोटे कार्यों के लिए सरकारी मदद की आस रखने वालों को गंगा के टापू में बसे सात गांव के लोगों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने अपने और क्षेत्र के तीन अन्य गांव के लोगों के आवागमन व गन्ना लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली के लिए कार सेवा कर 100 मीटर लंबा और आठ फीट ऊंचा बांध बनाया। उन्होंने घर-घर जाकर बांध के लिए साढ़े तीन लाख रुपये जुटाए थे।
शीशों वाली, टीकों वाली, भुड्डी वाली, मंदिर वाली, जहांगीर वाली, जाटों वाली, दारानगर गांव गंगा और राम गंगा पोषक नहर के टापू में बसे हैं। दारानगर के सामने तो पैंटून पुल लग जाता है, जिससे इस गांव के लोगों का आवागमन सुगम हो जाता है। लेकिन, बाकी गांव के लोगों के मार्ग में शीशों वाली के दक्षिण दिशा में बना नाला बाधक बनता है। उसे पार करने के लिए हर साल की तरह इस बार भी अस्थायी बांध बनाया गया है।
शीशों वाली के ग्राम प्रधान के पति हरपाल सिंह की अगुवाई में प्रेम चंद, चंद्रपाल, तेजपाल, टीकों वाली के नानक सिंह, हर चंद, राम भरोसे, भुड्डी वाली के रूपराम, ऊदल और जयवीर ने बांध बनाने का बीड़ा उठाया। इन्होंने ग्रामीणों के साथ कार सेवा की और 100 मीटर लंबा बांध तैयार किया। बांध को मजबूती देने के लिए उसके दोनों ओर पुआल और गन्ने की पत्ती लगाई गई। ग्राम प्रधान के पति ने बताया कि इस पर श्रमदान के साथ ही साढ़े तीन लाख रुपये खर्च हो गए। यह नाला बंद हाे जाए तो उनकी परेशानी दूर हो सकती है। हर साल बांध बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
पैंटून पुल से नहीं गुजर सकते गन्ना लदे भारी ट्रैक्टर ट्रॉली
नाले पर हर साल बांध बनाने की जरूरत इसलिए पड़ती है, क्योंकि दारानगर के सामने जो पैंटून पुल लगाया जाता है। उससे 30 से 40 क्विंटल तक वजन लेकर ट्रैक्टर-ट्रॉली गुजर सकते हैं। जबकि, चीनी मिल में किसान 50 से 70 क्विंटल तक गन्ना एक ट्रैक्टर ट्रॉली में लादकर ले जाते हैं। टापू में बसे गांवों के साथ ही चकनवाला, मुरादपुर, अलीनगर के ग्रामीण भी गन्ने लदे ट्रैक्टर ट्रॉली हर साल बनने वाले अस्थायी बांध से निकालते हैं।