गजराैला। बारिश और बाढ़ से खेत में खड़ी धान की फसल बर्बाद हाे गई। दो बेटियों के हाथ पीले करने की सोच रहे राधे लाल कश्यप को खासा धक्का लगा है। उनके अरमानों पर पानी फिर गया। वह अब अगले साल बेटियों की शादी करेंगे।
तिगरी गांव निवासी राधेलाल कश्यप मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। उनके परिवार में तीन बेटियां और पत्नी माया देवी हैं। एक बेटी की शादी कर दी है। दो बेटियां शादी योग्य हैं। राधेलाल के पास जो पैतृक जमीन है, वह गंगा पार है। जिसमें बाढ़ की मार रहती है। राधेलाल ने बताया कि दोनों बेटियों के इस बार हाथ पीले करने की सोचकर ही उन्होंने गांव के ही एक किसान से दस बीघे जमीन ठेके पर ली।
जमीन दो खेतों में विभाजित है। एक खेत तिगरी में सरकारी अस्पताल के पास है जबकि दूसरा सुनपुरा कलां के रकबे में है। दोनों खेतों में धान की फसल की रोपाई की थी। फसल अच्छी थी। मगर जैसे ही फसल कुछ बड़ी हुई। दोनों खेतों में बाढ़ का पानी भर गया। फसल पक जाने तक खेतों से बाढ़ का पानी नहीं सूखा। उन्हीं दिनों चली तेज हवा से फसल गिर गई थी।
अब बाढ़ का पानी खेत में सूख चुका था लेकिन तीन-चार दिन पहले बारिश हो गई जिससे दोबारा पानी भर गया। रही सही कसर मंगलवार सुबह हुई बारिश ने पूरी कर दी। पक कर तैयार हुई फसल गिर जाने से दाने खराब हो गए। दोनों खेतों में 40 क्विंटल पैदावार की संभावना थी लेकिन दस क्विंटल धान भी निकल आए तो बड़ी बात है। इस स्थिति में ठेके की रकम वापस करना भी मुश्किल हो जाएगा। फसल का नुकसान हो जाने के कारण इस साल बेटियों के हाथ भी पीले नहीं कर पाएंगे।
खेत में चारपाई डालकर काट रहे धान की फसल
गजरौला। पक कर तैयार धान के खेत में इस कदर पानी भरा है कि फसल काटकर रखने के लिए सूखी जमीन नहीं है। इस कारण किसान का परिवार धान काटकर पहले चारपाई पर रखता है। इसके बाद उसे खेत से बाहर निकाल कर लाते हैं। मंगलवार को जहां किसान की बेटियां पानी भरे खेत से धान की कटाई कर रही थीं, वहीं उनकी पत्नी गड्डी बांधकर बाहर निकालने में लगी थी।
कोट:
जिस किसान की धान या अन्य फसल नष्ट हुई है, उसे मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए सर्वे करा लिया गया है। कोई भी किसान मुआवजा राशि से वंचित नहीं रहेगा।- विभा श्रीवास्तव, एसडीएम मंडी धनौरा