अमरोहा। नकली नोटों की तस्करी करने वाले बिजनौर और दिल्ली के दो दोषियों को न्यायालय ने पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 20 हजार का जुर्माना लगाया है। दोनों दोषी जमानत पर बाहर थे। न्यायालय का फैसला आने के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया है।
नकली नोटों की तस्करी का मामला गजरौला जीआरपी थाने से जुड़ा है। 14 अप्रैल 2013 को थाने में तैनात तत्कालीन दरोगा श्यामवीर सिंह, हेड कांस्टेबल इशरत अली, राकेश यादव, विनोद कुमार के साथ रेलवे स्टेशन पर चेकिंग कर रहे थे। तभी मुखबिर की सूचना पर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर के टिनशेड के नीचे बैठे युवकों की तलाशी ली गई। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपना नाम आकाश शर्मा मोहल्ला खेड़ा थाना हल्दौर जनपद बिजनौर और सचिन गुप्ता निवासी ई-569 मेन शांतिमार्म विनोद नगर थाना मंडावली दिल्ली बताया, जबकि रॉबिन गुप्ता निवासी पुरदिल नगर थाना सिकंदरा राव जिला हाथरस बताया।
पुलिस ने पकड़े गए आकाश शर्मा और सचिन गुप्ता के पास से नकली नोट बरामद किए। पुलिस ने आकाश शर्मा के कब्जे से 4390 रुपये और सचिन गुप्ता की जेब से 1050 रुपये के नकली नोट बरामद किए थे। आरोपियों के कब्जे से नोट छापने के उपकरण भी मिले थे।
इस मामले में पुलिस ने आकाश शर्मा, सचिन गुप्ता और रॉबिन गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। जिसके बाद आकाश शर्मा और सचिन गुप्ता को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था। मामले में विवेचक ने 29 जून 2013 को आकाश शर्मा और सचिन गुप्ता के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इस मुकदमे की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश विशेष पॉक्सो एक्ट द्वितीय अरविंद कुमार शुक्ला की अदालत में चल रही थी।
सोमवार को न्यायालय ने मुकदमे में आखिरी सुनवाई की और नकली नोटों की तस्करी करने वाले आकाश शर्मा व सचिन गुप्ता को दोषी करार दिया। साथ ही दोनों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।