अमरोहा। शहर के जैन मंदिर कोट में चल रहे दशलक्षण पर्व के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम सत्य धर्म की आराधना की। सुबह मंदिर में जिनेंद्र भगवान का अभिषेक और रिद्धि मंत्रों के साथ भव्य शांतिधारा की गई। इसके बाद दशलक्षण मंडल विधान हुआ। शाम को आरती के साथ बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। सांगानेर से आए शास्त्री सौरभ जैन ने उत्तम सत्य धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि सत्य केवल जीभ का विषय नहीं, बल्कि आत्मा की जागृति का विषय है।
उन्होंने कहा कि आचार्य अमृतचंद्र सूरि ने पुरुषार्थसिद्ध्युपाय में असत्य बोलने के मूल में क्रोध, मान, माया और लोभ को प्रमुख कारण बताया है। क्रोध में व्यक्ति कठोर और असत्य वचन बोल देता है, जबकि अहंकार में दूसरों को नीचा दिखाने के लिए असत्य का सहारा लिया जाता है। छल-कपट से दूसरों को ठगने और लोभ के कारण धन-पद की प्राप्ति के लिए मनुष्य सत्य से विमुख हो जाता है। जब तक आत्मा से इन कषायों का क्षय नहीं होता, तब तक उत्तम सत्य धर्म की वास्तविक अनुभूति नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि गृहस्थ जीवन में सत्य धर्म को अपनाने के लिए कथन और करनी में एकरूपता जरूरी है। जैन दर्शन का स्याद्वाद और अनेकांत सिद्धांत प्रत्येक वस्तु को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखने और दूसरों के विचारों का सम्मान करने की सीख देता है। अपनी बात को ही अंतिम सत्य मानकर आग्रह करना भी असत्य की ओर ले जाता है। मधुर वाणी, निष्कपट व्यवहार और अनेकांत दृष्टि से ही जीवन में उत्तम सत्य धर्म का प्रादुर्भाव होता है।
इस दौरान जैन समाज समिति के अध्यक्ष योगेश जैन, मंत्री शरद जैन, कोषाध्यक्ष राजेश जैन, शुभम जैन, अरिहंत जैन, सिद्ध जैन, विनय जैन, सुरेंद्र जैन, रविंद्र जैन, राहुल जैन, बेला जैन, सीमा जैन, परगी जैन, हंसिका जैन मौजूद रहे।