अमरोहा के कैलसा में टूटी हुई पटरी।
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आगाह करने के बाद भी कैलसा में रेलवे फाटक-16 सी के पास पटरी में हुए फ्रैक्चर को सही करने की रेलपथ ने जहमत नहीं उठाई है। हादसे को दावत देते हुए चौथे दिन भी ट्रेन फ्रैक्चर हुए पटरी से गुजरती रहीं।
कैलसा रेलवे स्टेशन के फाटक-16 सी के पास पटरी में चार दिन पूर्व फ्रैक्चर हो गया था। इसको बदलने या मरम्मत करने की बजाय रेलपथ इंजीनियरों ने फ्रैक्चर हुए स्थान पर पैनल रख दिया। अमर उजाला ने रेलपथ इंजीनियरों को आगाह करते हुए 14 जनवरी के अंक में इस खबर को प्रकाशित किया। मगर आलस की गहरी नींद में सो रहे इंजीनियरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
फ्रैक्चर हुई पटरी को बदलने या इसकी मरम्मत की जहमत नहीं उठाई, बल्कि जहां पर फ्रैक्चर हुआ है, उस स्थान पर पैनल रख दिया है। हादसों को दावत देते हुए ट्रेन फ्रैक्चर हुई पटरी से धड़धड़ाती हुई गुजर रही हैं। शायद रेलपथ इंजीनियर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
रेलपथ इंजीनियर यह भूल गए हैं कि फ्रैक्चर के कारण ही कानपुर का बड़ा हादसा हुआ था और फ्रैक्चर के कारण ही गढ़ में ट्रेन डिरेल हो गई थी। उधर पीडब्ल्यूवाई के जितेंद्र कुमार पटेल का कहना है कि फ्रैक्चर वाले स्थान पर पैनल रखने से कोई दिक्कत नहीं है। इस तरह के पैनल रखे जाना पूरी तरह सुरक्षित रहता है।