जिले के प्राचीन मंदिरों में शुमार चौबारा का शिव मंदिर कई सौ साल पुराना इतिहास संजोए है। बुजुर्ग मंदिर को औरंगजेब के शासन काल का बताते हैं। कहते हैं जहां आज भव्य मंदिर है, वहां पर गांव के खलिहान होते थे। काम करते समय शिवलिंग निकला। जिस पर आस पास के गांवों के ग्रामीणों ने मंदिर बनवाया। यहां सावन के प्रत्येक सोमवार, शिवरात्रि व महाशिवरात्रि पर भक्त जलाभिषेक करते है। मान्यता है कि यहां पर जलाभिषेक करने से मनोकामना पूर्ण होती है। शिवरात्रि पर कांवड़ियों और शिवभक्तों का सैलाब उमड़ेगा। एक दिन पूर्व सेवादार तैयारी में लग गए।
नगर से सटे और हाईवे से करीब एक किमी पूर्व दिशा में बसे गांव चौबारा में आस्था का केंद्र प्राचीन शिव मंदिर है। इसमें भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित हैं। परिसर में ही शनिदेव मंदिर भी है। पुजारी पृथ्वीदास महाराज और महात्मा धर्मानंद महाराज की प्रतिमाएं बनी हैं। मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। गांव निवासी ओमवीर सिंह कश्यप, रामपाल सिंह, राजकुमार प्रजापति, किरनवती आदि ग्रामीणाें का कहना है कि वह अपने बुजुर्गों से सुनते आ रहे हैं, जहां आज भव्य मंदिर है, इस स्थान पर गांव के लोगों के खलिहान होते थे। काम करते समय शिवलिंग निकला। जिस पर चंदा की रकम भव्य मंदिर बनाया।
- सावन माह के प्रत्येक सोमवार पर यहां हजारों शिवभक्त और कांवड़िये जलाभिषेक कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक प्रवृत्ति के लोग घर में कोई मंगल कार्य होने पर यहां भंडारा कराते हैं। मान्यता है कि यहां पर मांगी मनौती पूर्ण होती है। बताया कि राकेश, गुड्डू, शिव किशोर, वीर सिंह आदि सेवादार शिवरात्रि की तैयारी में जुट गए हैं। - चंदनदास महाराज, मंदिर के पुजारी