कार्तिक पूर्णिमा पर लगता है मेला
कार्तिक पूर्णिमा पर लग रहे तिगरी गंगा मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए आने वाले पुलिसकर्मियों और अफसरों के शिविर तैयार होने लगे। बिजली के ठेकेदार के परिसर में भी कई तंबू तैयार हो गए। जिनको देख लग रहा है कि गंगा तट पर तंबुओं का शहर बसने लगा है। गंगा के तट पर लग रहा तिगरी गंगा मेला आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है।
पतित पावनी के तट पर पुण्य कमाने के लिए दूर-दूर जिलों के श्रद्धालु परिवार सहित आकर रहने लगते हैं। इसमें कई संस्कृतियों का संगम भी देखने को मिलता है। मेले का शुभारंभ 28 अक्तूबर को किया जाएगा। दीपावली, गोवर्धन पूजन, भैया दूज संपन्न हो गए हैं। अब श्रद्धालुओं के काफिले मेले केा उमड़ने लगेंगे।
उनकी सुरक्षा के लिए मेला कोतवाली बना दी गई है। उसके परिसर में पुलिस का कंट्रोल रूम बन रहा है। जिसका ढांचा तैयार हो गया है। परिसर में ही पुलिस अफसरों के शिविर तैयार हो गए हैं। उसके सामने बिजली के ठेकेदार ने काफी बड़ा परिसर घेरा है। जिसमें कई शिविर लग गए हैं।
बराबर में ही जिला पंचायत के शिविर बनाने के लिए टिन फेंसिंग कर दी गई है। पुलिस अफसरों के सैकड़ों शिविर को देख लग रहा है कि मेला स्थल पर तंबुओं का शहर बसने लगा है। एसडीएम विभा श्रीवास्तव ने बताया कि मेले में अब तक सैकड़ों शिविर तैयार हो गए हैं। मेला स्थल
तंबुओं के शहर जैसा लग रहा है।
तिगरी मेले में लोगों के लिए परेशानी का सबब बनेगा नाला
तिगरी मेले में गंगा किनारे का नाला श्रद्धालुओं की परेशानी का सबब बनेगा। स्नान के लिए गंगा किनारे पहुंचने में दिक्कत सामने आएगी। इस बार गंगा द्वारा मेला स्थल का काफी कटान किया जाने के कारण इस बार तिगरी मेले का स्वरूप बदल गया है जहां पिछले साल मेला गंगा की रेती में लगा था, वहीं इस बार पक्की भूमि पर बस रहा है।
इसके अलावा मेला करीब 600 मीटर उत्तर दिशा में लग रहा है। मेले में स्नान करने आने वाले श्रद्धालुओं को शिविर लगाने के लिए पर्याप्त भूमि मिल जाए। प्रशासन का इस पर जोर है। इसी कारण मेला स्थल पर खड़ी करीब 900 बीघे गन्ने की फसल को कटवाया जा रहा है। अधिकांश फसल काटी जा चुकी है।
मगर श्रद्धालुओं के लिए सबसे परेशानी का सबब किनारे का नाला बनेगा। इस नाले के कारण श्रद्धालुओं को स्नान घाट तक पहुंचने में दिक्कत आएगी।