तिगरीधाम। ऐतिहासिक तिगरी मेले में कार्तिक पूर्णिमा से पहले दिन शाम को दीपदान का विशेष ही महत्व माना जाता है, दीपदान 26 नवंबर की शाम को किया जाएगा। वहीं 27 नवंबर को तड़के से ही कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान शुरू हो जाएगा। दीपदान और कार्तिक पूर्णिमा स्नान पर 28 से 30 लाख श्रद्धालुओं का मेले में पहुंचने का अनुमान है।
कार्तिक मास में लगने वाले मेले में दीपदान और कार्तिक पूर्णिमा के मुख्य स्नान के दौरान श्रद्धालुओं के वाहनों पर मेले में प्रवेश वर्जित हो जाएगा। दीपदान के लिए लगभग दो किलोमीटर तक श्रद्धालुओं को पैदल जाना पड़ेगा। टीएसआई धर्मेन्द्र खोकर ने बताया कि जो भी श्रद्धालु वाहन से आता है, उसका प्रवेश मेले में नहीं होगा। वाहनों के लिए मेले से पहले ही कांकाठेर और गजरौला रोड पर खाली मैदानों में पार्किंग स्थल बनाए हुए हैं। सभी वाहन पार्किंग स्थल में खड़े होंगे। दीपदान और गंगा स्नान के लिए घाट तक श्रद्धालुओं को करीब दो किलोमीटर पैदल ही जाना होगा। पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि 26 नवंबर को दीपदान होगा। इसके बाद 27 नवंबर को ब्रह्म मुहूर्त में कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान प्रारंभ होगा।
दीपदान का महत्व
पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि मान्यता है कि महाभारत युद्ध में मारे गए हजारों सैनिक और असंख्य योद्धाओं की आत्मा शांति के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों की मौजूदगी में सर्वप्रथम चतुर्दशी को दीपदान किया था, तब से यह परंपरा चल रही है। तभी से कार्तिक पूर्णिमा पर तिगरी धाम लगने वाले ऐतिहासिक मेले के मुख्य स्नान से एक दिन चतुर्दशी पर अपने पितरों का तर्पण करते हैं। यह दीपदान वही लोग करते हैं, जिनके सगे संबंधी एक वर्ष के अंदर उन्हें छोड़कर परम पिता परमेश्वर की शरण में चले गए हैं। बताया कि गंगा में स्नान करने के बाद सूर्यास्त के समय दीपदान करें। गंगा में दीपदान करने से मृत आत्माओं को शांति मिलती है।