इससे पहले भी जिले में कई स्कूली वाहन हादसे का शिकार हो चुके हैं। जिनमें भी कई बच्चे घायल हुए थे। अगर परिवहन विभाग और यातायात पुलिस के जिम्मेदार अपनी ड्यूटी का निर्वहन ईमानदारी से करते तो शायद शिक्षिका और मासूम की जान नहीं जाती। परिवहन विभाग के रिकाॅर्ड के मुताबिक जिले में 692 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से 71 वाहन ऐसे हैं, जो अनफिट है। वहीं कई तो ऐसे है जिनका रिकॉर्ड भी परिवहन के पास नहीं है लेकिन परिवहन विभाग इन वाहनों के संचालन पर लगाम नहीं लग पा रहा है।
इतना ही नहीं ग्रामीण इलाकों के अधिकांश स्कूलों में खटारा वाहनों से बच्चों को ढोया जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि अधिकारियों को अभी और हादसों का इंतजार है। यही वजह है कि शासन के निर्देशों के बाद भी अनफिट, डग्गामार, खटारा और जुगाड़ वाहनों पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है।
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अभियानों तक सिमटी निगरानी
सरकार ने केंद्रीय मोटर यान अधिनियम 1989 में सवारी, निजी गाड़ियों की फिटनेस के लिए मानक जारी करने के साथ ही उसकी निगरानी की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की हुई है। इसकी जिम्मेदारी परिवहन विभाग में प्रवर्तन टीम की है। इसके अलावा सिविल एवं यातायात पुलिस भी फिटनेस प्रमाणपत्र की जांच कर सकती है। कई एजेंसियों की निगरानी के बावजूद अनफिट, डग्गामार वाहनों का बच निकलना लापरवाही को दर्शाता है।
ज्यादातर स्कूली वैन में लगी हैं गैस किट
हर मार्ग पर ऐसे खतरनाक वाहन फर्राटा भर रहे हैं। मैक्स, मारूति वैन और टाटा मैजिक सहित तमाम वाहनों में स्कूली बच्चों को ढोने का काम कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश की हालत खस्ता है जबकि कई वाहनों में तो नियम विरुद्ध गैस किट भी लगी हैं और इनमें सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। साथ ही फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है।
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अतिरिक्त सीटें डालकर भी मानकों के साथ खिलवाड़
स्कूल संचालकों ने छोटे वैन में अतिरिक्त सीटें लगवा रखी हैं। इनमें क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाए जा रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। वहीं दूसरी तरफ अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा की परवाह किए बिना इन वाहनों पर बच्चों को भेज रहे हैं।
इन हादसों को जिम्मेदार कौन
केस- एक
अमरोहा जोया रोड स्थित ओवरब्रिज पर 19 सितंबर 2021 को स्कूल वैन कार में घुस गई थी। हादसे में पांच बच्चे घायल हो गए थे। घायल बच्चों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हादसे की वजह वैन का स्टेयरिंग फेल होना बताया गया था। वैन पर किसी स्कूल का नाम नहीं लिखा था। इस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
केस- दो
हसनपुर के सुनील कुमार एकेडमी से 21 नवंबर 2023 को छुट्टी के बाद ईसापुर सरकी निवासी वैन चालक सुनील कुमार बच्चों को वैन में बैठाकर रोजाना की तरह उनके घर छोड़ने जा रहा था। सैदनगली थानाक्षेत्र के गांव नूरपुर खुर्द में महमूदपुर बंगर को जाने वाले कच्चे रास्ते पर स्कूल वैन अनियंत्रित होकर तालाब की तरफ पलट गई थी। गनीमत रही कि तालाब में पानी नहीं था। इस हादसे में नौ बच्चे घायल हो गए थे।
केस- तीन
रजबपुर थानाक्षेत्र के गांव मंगूपुरा निवासी अनिल एक स्कूल में बच्चों को लाने और ले जानी वाली वैन चलाते हैं। 4 जुलाई 2025 की दोपहर स्कूल की छुट्टी हो जाने पर बच्चों को छोड़कर चालक वापस जा रहे थे। उनके साथ हसनपुर निवासी सोनिया थीं, जो वैन पर हेल्पर का काम करती हैं। वैन सरकारी अस्पताल के पास पहुंची थी कि अचानक टायर के नीचे कोई नुकीला पत्थर आ गया। इससे वैन का टायर फट गया और वह अनियंत्रित होकर पलट गई थी। आसपास के लोगों ने दोनों चालक व हेल्पर को वैन से बाहर निकाला और सीएचसी में भर्ती कराया था।
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केस- चार
हसनपुर के गजरौला रोड पर बीते शुक्रवार को स्कूली वैन की पिकअप से टक्कर हो गई। इसमें वैन सवार छात्रा अनाया और शिक्षिका निशा की मौत हो गई जबकि वैन चालक, 13 बच्चे और एक शिक्षिका घायल हो गईं। इस हादसे में घायल चार की हालत गंभीर बनी है। प्रथम दृष्टया पिकअप चालक की लापरवाही से हादसा होने की बात सामने आई है। लेकिन, निजी वैन से स्कूली बच्चों को ढोया जा रहा था, यह भी अपराध है। वैन में स्कूल वाहनों के मानक भी पूरे नहीं हैं।
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स्कूलों के अनफिट वाहन और अन्य तरह के वाहनों पर लगातार कार्रवाई की जाती रही है। पिछले 16 दिनों में 83 स्कूल वाहनों के चालान काटे गए हैं। स्कूल संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं। जल्द ही अभियान चला कर बड़ी कार्रवाई की जाएगी। - महेश शर्मा, एआरटीओ प्रवर्तन