अमरोहा। सितंबर में हुई दुष्कर्म की वारदात के आरोपी की अब तक गिरफ्तारी न होने और इस बीच दुष्कर्म पीड़िता की हत्या हो जाने से आदमपुर थाना पुलिस की भूमिका पर हर जगह सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले क्षेत्र से एक किशोरी गायब होने के मामले में आदमपुर थाने की पुलिस उसके पिता, भाई और रिश्तेदार को किशोरी की हत्या (ऑनर किलिंग) का आरोपी बनाकर जेल भेजने में अपनी किरकिरी करा चुकी है। जबकि कुछ समय बाद वह किशोरी जीवित पाई गई थी। तब से अब तक आदमपुर थाने की पुलिस टीम बदल गई लेकिन ताजे घटनाक्रम से यह बात साफ हो गया है कि पुलिस का रवैया नहीं बदला।
आदमपुर थानाक्षेत्र के गांव से किशोरी के गायब होने की घटना छह फरवरी 2019 को हुई थी। लापता किशोरी के भाई ने पांच लोगों के खिलाफ बहन के अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन तत्कालीन पुलिस टीम ने किशोरी के पिता, भाई और रिश्तेदार को किशोरी की हत्या का आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था। तर्क दिया था कि बेटी के चाल-चलन से निराश होकर घर वालों ने हत्या कर दी थी और शव गंगा में बहा दिया था।
सात अगस्त 2020 को किशोरी के अपने प्रेमी के घर सुरक्षित पाए जाने पर पुलिस की झूठी कहानी से परदा उठा था। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर तत्कालीन इंस्पेक्टर सहित 11 पुलिस कर्मियों के खिलाफ आदमपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। इसकी विवेचना आदमपुर के इंस्पेक्टर सतीश कुमार आर्य कर रहे थे, लेकिन रविवार को फिर आदमपुर क्षेत्र में दुष्कर्म पीड़िता की हत्या होने और दुष्कर्म के फरार आरोपी पर इस हत्या का आरोप लगने के बाद पिछले इंस्पेक्टर की जांच कर रहे सतीश कुमार आर्य समेत तीन पुलिस कर्मियों को एसपी ने निलंबित कर दिया है।