जिले में स्वास्थ्य सेवाएं कितनी सुदृढ़ हैं, इसका अंदाजा जिला अस्पताल में ठप पड़ी अल्ट्रासाउंड सेवा से लगाया जा सकता है। कहने को यहां अल्ट्रासाउंड के लिए दो विंग बनी हैं, लेकिन तैनाती एक रेडियोलॉजिस्ट की है। इसके चलते मरीजों को तारीख देकर लौटाया जा रहा है।
गर्भवती महिलाओं को छोड़कर अन्य बीमारी के मरीजों को अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं मिल पा रही है। आलम यह है कि कई-कई चक्कर लगाने के बाद भी मरीज बेबस होकर लौट जाते हैं। उन्हें दस-दस दिन की तारीख देकर लौटाया जा रहा है। मंगलवार को भी कई मरीज परेशान नजर आए।
जिला अस्पताल में मरीजों के मुफ्त अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध हैं। एक विंग इमरजेंसी तो एक महिला वार्ड में बनी है। बताया जा रहा है कि महिला विंग के रेडियोलॉजिस्ट नौकरी छोड़कर चले गए हैं, जिसके बाद इमरजेंसी विंग के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विजयपाल पर जिम्मेदारी आ गई है। लेकिन, वह कई बार कानूनी प्रक्रिया के चलते बाहर रहते हैं। जिसके बाद से दिक्कत बनी हुई है। आलम यह है कि हर रोज 50 से 60 मरीज अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचते हैं, जिनमें चंद मरीजों की जांच हो जाती है। इसके अलावा अन्य मरीजों को दस या उससे अधिक दिन की तारीख देकर वापस भेज दिया जा रहा है। सोमवार को पेट दर्द व अन्य बीमारी से पीड़ित मरीज बिना अल्ट्रासाउंड कराए वापस लौट गए।
महिला विंग पर लटका मिला ताला
जिला अस्पताल की महिला विंग के अल्ट्रासाउंड सेंटर पर मंगलवार को ताला लटका रहा। यहां महिलाएं पहुंची, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। जबकि, रेडियोलॉजिस्ट इमरजेंसी के अल्ट्रासाउंड करने में व्यस्त रहे। महिला विंग में पहुंचीं महिलाओं ने बताया कि वह कई घंटे से इंतजार में बैठे हैं, लेकिन यहां ताला लटका हुआ है।
- लगातार चार दिन से अल्ट्रासाउंड कराने के लिए जिला अस्पताल आ रही हूं। लेकिन, कभी नंबर नहीं लग पाता है और कभी चिकित्सक न होने का बहाना बनाकर टरका दिया जाता है। मंगलवार को भी अस्पताल पहुंची तो केबिन का ताला लगा हुआ मिला। उन्हें बाद में एक फरवरी की तारीख दी गई।
- फरजाना, कनपुरा
- शनिवार के बाद सोमवार और मंगलवार को लगातार अल्ट्रासाउंड कराने पहुंची। मुझे पेट में परेशानी है। महिला विंग में सुबह से केबिन खुलने का इंतजार किया। वहीं, इमरजेंसी में पहुंचने पर उन्हें इंतजार करने के लिए कहा। बाद में उन्हें चार दिन की तारीख दे दी गई। ऐसे में वापस घर लौटना पड़ रहा है।
- भूरी, असमोली
- चिकित्सकों के साथ-साथ रेडियोलॉजिस्ट की कमी है। दो विंग होने के बावजूद यहां एक ही रेडियोलॉजिस्ट हैं। जिन पर कानूनी प्रक्रिया व गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड की जिम्मेदारी है। जिसके चलते अन्य मरीजों के लिए समय नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, प्रयास रहता है कि गंभीर बीमारी के मरीज का अल्ट्रासाउंड किया जाए। वहीं, एक अन्य रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। -
डॉ. प्रेमापंत त्रिपाठी, सीएमएस