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Amroha News: जल्द आसान होगी 40 गांवों की राह

Sat, 01 Feb 2025 01:16 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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गजरौला के कांकाठेर में फाटक बंद होने पर कई लोग ऐसे भी निकलते हैं।  संवाद 
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गजरौला (अमरोहा)।
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कांकाठेर और महेशरा में रेलवे फाटक पर जल्द ही अंडरपास का निर्माण शुरू हो जाएगा। दरअसल, रेलवे की ओर से जहां निर्माण कार्य के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। वहीं, कार्यदायी संस्था भी नामित कर दी है। दोनों स्थानों पर बनने वाले अंडरपास पर चार-चार करोड़ रुपये खर्च होंगे। दोनों स्थानों पर अंडरपास से 40 से अधिक गांवों के लोगों की राह आसान होगी। ग्रामीणों को फाटक खुलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

दिल्ली-लखनऊ रेलवे लाइन पर कांकाठेर गांव में रेलवे का फाटक है, जिस पर अंडरपास के निर्माण को बीते साल मंजूरी मिल गई थी। इसके अलावा महेशरा रेलवे स्टेशन के पास हापुड़ की दिशा में फाटक-41 ए पर अंडरपास को स्वीकृति दी गई है।
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दोनों स्थानों पर अंडरपास बनाए जाने पर चार-चार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। चार मीटर ऊंचे और पांच मीटर चौड़ाई के अंडरपास 180 से 200 मीटर लंबे बनाए जाएंगे। दोनों अंडरपास कवर्ड बनाए जाएगे। इनमें बरसात का पानी अंदर नहीं जाएगा।

बराबर में ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगाए जाएंगे, जिनमें बरसात का पानी भरने से भूमिगत जलस्तर में भी सुधार होगा। रेलवे ने दोनों स्थान पर अंडरपास बनाए जाने के लिए कार्यदायी संस्था नामित कर दी है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो सकता है।

रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर नवीन पाल ने बताया कि जल्द ही अंडरपास का निर्माण कार्य शुरू हो सकता है। दोनों स्थानों पर अंडरपास से 40 से अधिक गांवों के ग्रामीणों की राह आसान होगी।
तिगरी जाने वालों को भी होगी राहत
तिगरी गंगा पर हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा मेला लगता है। मेले में 30 लाख से ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालु गजरौला, ओसीता जगदेवपुर और कांकाठेर की ओर से मेले आते हैं। मुख्य स्नान पर डुबकी लगाकर श्रद्धालुओं के ट्रैक्टर-ट्रॉली ओसीता जगदेवपुर व कांकाठेर से ही वापस जाते हैं। दिल्ली-लखनऊ रेलवे मार्ग पर स्थित कांकाठेर में रेलवे का फाटक है। इस रूट से 24 घंटे में 100 ट्रेन गुजरती हैं, जिनके लिए फाटक बंद करना पड़ता है। गंगा मेले के दौरान फाटक बंद करने पर दूर-दूर तक श्रद्धालुओं के वाहनों की लाइन लग जाती है। अब अंडरपास बनने से जाम नहीं लगेगा। इसी तरह महेशरा के पास फाटक 41 ए बंद होने पर भी आसपास के करीब 15 से अधिक गांवों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। गन्ने के सीजन में दिक्कत और बढ़ जाती है। दूर तक वाहनों की कतार लग जाती है। अंडरपास बनने पर जहां उनकी परेशानी दूर होगी, वहीं हादसे का भी डर नहीं रहेगा।
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बंद फाटक से निकलने में जान गंवा बैठा था चरवाहा
आमतौर पर लोग लापरवाही का परिचय देते हैं। फाटक खुलने का इंतजार नहीं करते। बंद फाटक पर बूम के नीचे से पार होते समय हादसे का शिकार हो जाते हैं। कांकाठेर में बीते साल दस नवंबर की शाम संभल के नखासा क्षेत्र के गांव ईशापुर सुनवारी निवासी चरवाहा चंद्रपाल (45) हादसे का शिकार हो गए थे। उनके साथ 20 से अधिक भेड़ ट्रेन की चपेट में आकर कट गई थीं। रेलवे फाटक बंद होने पर भेड़ रेलवे ट्रैक पर पहुंच गई थीं। जिनको बचाने के चक्कर में चंद्रपाल भी जान गंवा बैठे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया था कि फाटक के स्थान पर अंडरपास होता तो चरवाहा और 20 से अधिक भेड़ों की जान नहीं जाती।
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