अमरोहा। किसान की मौत के बाद बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इन्कार कर दिया। अब उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को कुल धनराशि दो लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बीमा कंपनी को आर्थिक-मानसिक और वाद व्यय खर्च के रूप में 15 हजार रुपये भी अदा करने होंगे।
मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र के भानपुर खालसा निवासी पतराम सिंह का गजरौला स्थित एक बैंक में खाता था। उनके बचत खाते में प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत पॉलिसी थी। 20 अगस्त 2019 को पतराम सिंह की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। इस मामले में परिजनों ने दिल्ली नंबर वाहन चालक के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पतराम सिंह के बेटे योगेश कुमार व बेटी दुर्गेश ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया था लेकिन बैंक व बीमा कंपनी द्वारा कोई सुनवाई नहीं की गई। आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी गई लेकिन फिर भी बीमा कंपनी की ओर से काई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। 14 जुलाई 2020 को बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इन्कार कर दिया।
इस पर पतराम सिंह की पत्नी सावित्री देवी, उनके बेटे योगेश कुमार और बेटी दुर्गेश ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने बैंक और बीमा कंपनी के अफसरों को तलब किया। उपभोक्ता फोरम ने कहा कि एफआईआर पब्लिक दस्तावेज है।
बैंक द्वारा प्रमाणित ने किए जाने पर भी यदि वह संबंधित थाने की प्रति है तो वह साक्ष्य में पढ़ी जाएगी। इसी तरह मृतक पतराम सिंह का पंचनामा भी पब्लिक दस्तावेज है। इसे भी यदि सक्षम अधिकारी तैयार करता है तो वह भी साक्ष्य होगा। यही नियम पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी लागू होता है। बैंक और बीमा कंपनी ने जिन दस्तावेजों की मांग की गई है उसे कोर्ट ने विधिविरुद्ध बताया। जिसके आधार पर आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह ने बीमा कंपनी को कुल धनराशि दो लाख रुपये को नौ प्रतिशत ब्याज के साथ देने के निर्देश दिए हैं।