अमरोहा। जिले को अस्तित्व में आए करीब 28 साल का समय बीत गया है। धीरे-धीरे जिले में सभी महत्वपूर्ण कार्यालयों व जरूरी सुविधाओं को बढ़ावा मिला लेकिन पिछले कई सालों से जिले में जेल के लिए जमीन नहीं मिल पा रही है। दो गांवों में जमीन का चिह्नीकरण किया गया लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
अमरोहा पहले मुरादाबाद जिले का हिस्सा हुआ करता था। साल 1997 में इसे तीन तहसीलों समेत मुरादाबाद से अलग कर जिले का दर्जा मिला था। इसके बाद से अमरोहा को जिले के रूप में खड़ा करने की कवायद शुरू हो गई थी। समय के साथ ही जिले में कलक्ट्रेट समेत विकास भवन, जिला अस्पताल, कचहरी का निर्माण हुआ तो नौगांवा को भी तहसील का दर्जा दे दिया गया। इसके बाद जिले में तहसीलों की संख्या भी चार हो गई। फिलहाल हसनपुर में नई तहसील का निर्माण पूरा हो चुका है जबकि अमरोहा व नौगांवा सादात में तहसील अभी भी निर्माणाधीन है। वहीं, कुछ विभागों के लिए अमरोहा को अभी भी दूसरे जिलों पर ही निर्भर होना पड़ रहा है।
प्रदूषण व नेडा के विभागीय योजनाएं व कार्य जहां बिजनौर से संचालित होते हैं, वहीं अभी तक जिले में जेल का निर्माण भी पूरा नहीं हो सका है। यहां न्यायालय अपराधियों को बिजनौर अथवा मुरादाबाद की जेलों में भेजा जाता है। जिले में जेल के निर्माण को जमीन की तलाश पिछले कई सालों से पूरी नहीं हो सकी है।
मीरा सराय व डिडौली क्षेत्र में तलाश लेकिन लोगों ने किया मना
पहले प्रशासन की ओर से अमरोहा के पास मीरा सराय में करीब 24.5 हेक्टेयर जमीन तलाश की गई थी लेकिन इसी दौरान नगर पालिका का परिसीमन होने के कारण मीरा सराय अमरोहा का हिस्सा हो गया। इसके बाद वहां लोगों ने जमीन देने से हाथ खड़े कर दिए जिसके बाद जमीन अधिग्रहण की कवायद शुरू नहीं हो सकी। इसके बाद पिछले वर्ष डिडौली क्षेत्र के रसूलपुर गुर्जर में पुलिस व प्रशासन ने जमीन देखकर वहां जेल के निर्माण की कवायद शुरू करने का निर्णय लिया लेकिन वहां भी ग्रामीणों ने जेल के निर्माण का विरोध शुरू कर दिया। जिससे वहां भी जेल के लिए जमीन मिलने की आस पूरी न हो सकी।
जिला कारागार के लिए जमीन की तलाश की गई थी। लेकिन ग्रामीणों द्वारा जमीन देने से मना कर दिया गया था। जेल के निर्माण को जमीन की तलाश की जा रही है। जैसे ही जमीन मिलेगी, जेल के निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। - निधि गुप्ता वत्स, डीएम