अमरोहा। हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर अधिवक्ताओं की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 25 से 30 जिलों के अधिवक्ता व वादकारी हाईकोर्ट बेंच न मिलने से प्रभावित हो रहे हैं। वह पिछले 50 साल से बेंच की मांग कर रहे हैं लेकिन उनकी मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी है।
कमजोर जन प्रतिनिधित्व के कारण अधिवक्ता पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बेंच की मांग पूरी नहीं होने का एक प्रमुख कारण है। जन हित के इस मुद्दे को न तो सांसद उठा पाते हैं और न ही विधायक। जनता के बीच जाकर केवल खानापूर्ति कर लेते हैं और फिर लौटकर पीछे देखते भी नहीं है। जनता का मुद्दा हमेशा अधिवक्ता ही उठाते रहे हैं। सस्ता व सुलभ न्याय का मुद्दा हमेशा ही गौण होता रहा है। पूरब की राजनीति के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं की मांग आज तक परवान नहीं चढ़ सकी है। जब भी बेंच की मांग लगता है कि पूरी होने वाली है तभी वहां के अधिवक्ता व जनप्रतिनिधि इसे रुकवा देते हैं। संवाद