गजरौला के तिगरी में मेला स्थल पर शकरकंद की खुदाई करते ग्रामीण।
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गजरौला। कार्तिक पूर्णिमा पर तिगरी मेले की युद्धस्तर पर तैयारी करा रही जिला पंचायत के सामने गन्ने, उड़द, शकरकंद और धान की फसल ने चुनौती खड़ी कर दी है। धान की कटाई और शकरकंद की खुदाई कर रहे किसानों का कहना है कि चीनी मिल नहीं शुरू नहीं हुई हैं, वह गन्ना कहां ले जाएं।
ऐन वक्त पर तिगरी मेला आयोजित कराने के लिए जिला प्रशासन को शासन से अनुमति मिली। मेला राजकीय होने के बावजूद जिला प्रशासन ने जिला पंचायत को ही मेला आयोजित कराने का जिम्मा सौंपा है। समय कम है। इसलिए युद्घस्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। 14 सेक्टर में विभाजित होने वाले मेले में छह सेक्टर में सदर गेट बनाया जाएगा। मगर यहां पर धान, गन्ना, शकरकंद और उड़द की फसल खड़ी हैं। मेला की युद्धस्तर पर तैयारी की जाने के कारण किसान धान की कटाई और शकरकंद को खोद रहे हैं। उड़द की फसल भी काटी जा रही है। कुछ किसान गन्ने को भी काट रहे हैं, लेकिन अधिकांश का कहना है कि अभी चीनी मिलें चली नहीं हैं। गन्ना कहां ले जाकर डालें। कोल्हुओं पर भाव नहीं है। वह औने पौने दाम में गन्ना खरीद रहे हैं। उनको खेत खाली करने के लिए एक दो दिन की मोहलत दी जाए। जिला पंचायत के जेई सज्जाद हुसैन का कहना है कि जहां पर सदर गेट बनाया जाएगा, वहां फसल खड़ी हैं। जिसकी वजह से दिक्कत आ रही है। हालांकि किसान अपनी फसलों को काट रहे हैं।
किसान बोले आधे रेट में जा रहा गन्ना
गजरौला। सरकार द्वारा 25 रुपये बढ़ाए जाने के कारण इस बार गन्ने का भाव तकरीबन साढ़े तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। मगर तिगरी में मेला स्थल पर खड़ी फसल को काटे जाने की हिदायत मिलने के बाद किसान खेतों को खाली करने में लगे हैं। तिगरी निवासी घासी सिंह का कहना है कि उनका चार बीघे गन्ना था। जिसमें उन्होंने अधिकांश काट लिया है। कोल्हुओं ने 180 रुपये क्विंटल खरीदा, जबकि मिल पर साढ़े तीन सौ में जाता। गांव निवासी खड़ग सिंह, रोहताश सिंह, विनोद त्यागी, सर्वेश सिंह का कहना है कि इस समय किसानों का गन्ना आधे दामों में जा रहा है। किसान को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। संवाद