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Amroha News: रास्ते की जमीन के विवाद में किसान को उतार दिया था मौत के घाट

Sun, 22 Jun 2025 02:44 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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अमरोहा।
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आज के समय में इंसान सगे-संबंधी से नाता छोड़कर जमीन और पैसे को तवज्जों देने लगा है। ऐसा ही एक मामला डिडौली कोतवाली क्षेत्र के फरासपुर गांव में करीब पांच साल पहले हुआ था। गांव में रास्ते की मामूली जमीन को लेकर परिवार के ही लोगों ने किसान की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस घटना को पांच साल बाद भी लोग भूल नहीं पाए हैं।
हत्या में दोषी ठहराए गए पिता-पुत्र और सगे भाई समेत नौ लोगों को उम्रकैद की सजा हो चुकी है, जबकि तीन बाल अपचारियों को दस-दस साल की सजा मिली है, लेकिन जिस जमीन को लेकर विवाद हुआ वह आज भी मौके पर है। इस घटना के बाद एक ही परिवार के दोनों घर बर्बादी की कगार पर पहुंच गए। क्योंकि, मामले में हत्या के दोषियों से मारपीट करने के मामले में मृतक के नौ परिजनों को भी पांच-पांच की साल की सजा हुई।
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डिडौली कोतवाली क्षेत्र के फरासपुरा गांव में किसान बाबूराम और उनके भाई दिवंगत रामफल के परिवार रहते हैं। बाबूराम और उनके भतीजे बलवीर के बीच रास्ते में दीवार को लेकर विवाद चल रहा था। नौ जुलाई 2020 की सुबह करीब छह बजे बाबूराम बच्चों के साथ घर में बैठे थे। तभी, बलवीर ने परिवार के लोगों के साथ लाठी-डंडों और सरियों से लैस होकर उनके घर पर चढ़ाई कर दी थी। उन्होंने बाबूराम को बुरी तरह पीटा था, जिससे उनकी मौके पर मौत हो गई थी। बचाव में आए परिवार के उमेश, रामचंद्र, शिवचंद, रचना, राधेश्याम व सुमित्रा को भी आरोपियों ने पीटकर लहूलुहान कर दिया था।
पुलिस ने घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाकर कलक्ट्रेट पर हंगामा किया था। इसके बाद पुलिस ने किसान बाबूराम की पीटकर हत्या करने में उनके बेटे राधेश्याम की तहरीर पर चमन सिंह, पवन, उभन, चंद्रपाल सिंह, बलवीर, देवेंद्र, मोहित, रोहित, सतीश, विकास, कमलकांत, अजब सिंह, विनोद समेत 16 लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में पुलिस ने सभी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था। वहीं, बलवीर पक्ष ने परिवाद दायर कर मृतक बाबूराम पक्ष के राजेश उर्फ राधेश्याम, उमेश सिंह, दिनेश सिंह, रचित, दीपक, रामचंद्र, अमित, शिवचंद्र और मोहित को मारपीट के दौरान हड्डी तोड़ देने का आरोपी बनाया था।
17 अप्रैल 2025 को कोर्ट ने सुनाई थी सजा
पुलिस ने इनको को भी कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था। 17 अप्रैल 2025 को न्यायालय ने सुनवाई करते हुए दोषी चमन सिंह व उसका बेटा विकास, बलवीर व उसके बेटे पवन, उभन और देवेंद्र व उसके बेटे मोहित, रोहित और परिवार के चंद्रपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही इन पर 5,89,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया । इसके अलावा हत्या के दोषियों के परिजनों से मारपीट में मृतक के परिवार के राजेश उर्फ राधेश्याम, उमेश सिंह, दिनेश सिंह, रचित, दीपक, रामचंद्र, अमित, शिवचंद्र और मोहित को पांच-पांच साल की सजा सुनाई और 99 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। इसके अलावा तीनों किशोरों पर 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।
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बाबूराम के फेफड़ों में घुस गई थीं पसली की टूटी हड्डियां
हत्या के मामले में मारपीट में सबसे अधिक चोटें वादी मुकदमा राधेश्याम के शरीर पर लगी थीं। उन्हें 21 चोटे आई, जबकि मृतक बाबूराम के शरीर पर 12 चोटों के निशान थे। उमेश के शरीर पर 18 चोटें आई थीं। पिटाई के दौरान मृतक बाबूराम की पसली की हड्डियां टूटकर फेफड़ों में घुस गई थी, जो मौत का कारण बनी थीं। उधर, दूसरे पक्ष के चमन के शरीर पर सात, विपुल के शरीर पर सात, देवेंद्र के शरीर पर पांच चोटों के निशान मिले थे।
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