अमरोहा। मंडी धनौरा की चुचैला कलां स्थित बहुद्देश्यीय सहकारी समिति में हुए फर्जीवाड़े का मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया है। सीएम कार्यालय के इंफोर्मेशन सेल ने भी मामले में रिपोर्ट तलब की है। उधर, मंगलवार को जांच टीम ने समिति पहुंचकर किसानों के बयान व साक्ष्य एकत्र किए। समिति के फर्जीवाड़े में सौ अधिक किसानों के प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। फर्जीवाड़े में एक ही रसीद से दो-दो किसानों का ऋण जमा करा दिया गया। इसमें बैंक के कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।
जिले में कुल 45 सहकारी समितियों संचालित हैं। किसानों को खाद व बीच उपलब्ध कराने का काम करती हैं। इसके साथ ही किसानों को ऋण का वितरण भी किया जाता है। चुचैला कलां स्थित बहुद्देश्यीय सहकारी समिति से भी करीब दो हजार किसान जुड़े हुए हैं। इस समिति से किसानों के साथ ऋण के नाम पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है जिसमें समिति कर्मचारियों ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है। किसानों की शिकायत पर डीआर सहकारिता मुरादाबाद ने जांच के लिए टीम बना दी। किसानों के साथ हुए इस फर्जीवाड़े की गूंज अब शासन तक भी पहुंच गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय के इंफोर्मेशन सेल ने इस पूरे मामले की रिपोर्ट तलब कर ली है। जिससे विभाग में खलबली मच गई है।
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मंगलवार को समिति पहुंची जांच टीम
फर्जीवाड़े की जांच के लिए डीआर सहकारिता वीर विक्रम सिंह की और से अपर जिला सहकारी अधिकारी उमेश कुमार व एडीओ राजकुमार की टीम बनाई है। मंगलवार को जांच टीम चुचैला कलां स्थित समिति पहुंची तथा पीड़ित किसानों के बयान दर्ज किए। इसके साथ ही टीम ने किसानों से साक्ष्य भी लिए। किसानों का कहना है कि उन्होंने कई बार मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से की। उसके बाद मामले की जांच तो हुई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी। अब विभागीय उच्चाधिकारियों से शिकायत के बाद फर्जीवाड़े की जांच में तेजी आई है। बताते हैं कि इस फर्जीवाड़े में करीब सौ से अधिक किसान प्रभावित हो सकते हैं।
एक ही रसीद से जमा दिखा दिए दो किसानों का ऋण
किसानों के साथ हुए इस फर्जीवाड़े में बैंक के कर्मचारियों की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। समिति के कर्मचारियों को किसानों ने ऋण के लिए जमा करने के बाद दी गई रसीद से दूसरे लोगों ऋण जमा किया दर्शा दिया गया। जिससे दूसरे किसान ने ऋण जमा तो किया, लेकिन वह बैंक तक नहीं पहुंचा। इसके अलावा कई किसानों द्वारा ऋण की रकम जमा करने के बाद भी रसीद नहीं दी गई, और उनको डिस्चार्ज दिखा दिया गया।
मामले की जांच की जा रही है। मंगलवार को जांच टीम ने समिति पहुंच कर किसानों के बयान लेते हुए उनके साक्ष्य लिए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। - वरुण अग्रवाल, एआर कोऑपरेटिव