कंपोजिट विद्यालय के स्टाफ की लापरवाही दो छात्रों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ गई। स्टॉफ के कहने पर कक्षा दो के प्रश्नपत्र की फोटोकॉपी कराने जा रहे दोनों छात्रों की स्कूटी को सामने से आ रही एक पिकअप ने टक्कर मार दी।
दोनों को गंभीर हालत में सरकारी अस्पताल से मेरठ के लिए रेफर किया गया है। उधर, हादसे के बाद भाग रहे चालक को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। जिसे पुलिस को सौंप दिया। बीएस ने प्रधानाध्यापक नाहिदा सुल्तान और स्कूटी देने वाले विद्यालय के शिक्षक संजय सागर को निलंबित कर दिया है। साथ ही बीईओ अरुण कुमार से शिक्षक संजय के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए कहा है।
मामला ब्लॉक के गांव मिठ्ठनपुर के कंपोजिट विद्यालय का है। सोमवार से परिषदीय स्कूलों की परीक्षा शुरू हुईं। ब्लॉक के गांव मिठ्ठनपुर के कंपोजिट विद्यालय में भी परीक्षा थी। विद्यालय में कक्षा दो में 14 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। लेकिन, जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण बंडल में कक्षा दो का सिर्फ एक प्रश्नपत्र ही निकला। बंडल में प्रश्नपत्र कम निकलने पर स्टॉफ ने उसकी फोटोकॉपी कराने के लिए कक्षा आठ के छात्र चाहत और शिवम को पास के गांव चुचैला कलां भेज दिया।
इसके लिए स्टॉफ ने नाबालिग छात्राें को अपनी स्कूटी दी थी। कुछ दूर जाने पर छात्रों की स्कूटी को सामने से आ रही पिकअप के चालक ने टक्कर मार दी। हादसे में दोनों छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्रामीणों ने पिकअप चालक को पकड़ लिया और बच्चों को सरकारी अस्पताल भिजवाया। चाहत के पैर की हड्डी टूट गई, जबकि शिवम के सिर में चोट लगी है। चिकित्सक ने उनकी हालत देखते हुए रेफर कर दिया। जानकारी मिलने पर अस्पताल पहुंचे परिजन उनको मेरठ ले गए।
शिक्षकों की लापरवाही से बच्चों की जान जा सकती थी
नियम और कायदे कानून के बारे में शिक्षक इतने लापरवाह हो सकते हैं। इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। प्रश्नपत्र कम पाए जाने पर शिक्षकों ने 13 साल के दो छात्रों को फोटोकॉपी कराने के लिए अपनी स्कूटी लेकर भेज दिया। जबकि, शिक्षकों को भी मालूम था कि 18 वर्ष से कम आयु का कोई भी बच्चा वाहन नहीं चला सकता है। इसके बावजूद भी शिक्षकों ने बच्चों को स्कूटी लेकर भेज दिया। कंपोजिट विद्यालय में तैनात शिक्षक प्रश्नपत्रों की फोटोकॉपी कराने के लिए खुद जा सकते थे। लेकिन, उनकी लापरवाही से बच्चों की जान पर बन आई। प्रश्नपत्रों की फोटोकॉपी कराने के लिए नाबालिग बच्चों को स्कूटी लेकर भेजना लापरवाही है। यदि प्रश्नपत्र कम थे तब कोई भी एक शिक्षक स्वयं जाकर फोटोकॉपी करा सकता था।
तैयारियों के बावजूद प्रश्नपत्र कैसे कम निकले
परिषदीय विद्यालयों की परीक्षाओं को विभाग कितनी गंभीरता से लेता है। इसका उदाहरण मिठ्ठनपुर के कंपोजिट विद्यालय में देखने को मिला। यहां कक्षा दो के लिए केवल एक ही प्रश्नपत्र भेजा गया। जबकि, कक्षा में 14 बच्चे पंजीकृत हैं। परीक्षा की तैयारी काफी समय से की जा रही थी। बीएसए ऑफिस में पूरे जिले के छात्रों का रिकार्ड रहता है। फिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। 14 बच्चों के सापेक्ष में मात्र एक प्रश्नपत्र भेजकर विभागीय अधिकारियों ने अपने काम की जिम्मेदारी पूरी कर ली। यदि प्रश्नपत्र पूरे होते तो शायद उन बच्चों को फोटोकॉपी कराने के लिए नहीं भेजा जाता। इस घटना से साफ है कि बेसिक शिक्षा विभाग अपनी जिम्मेदारियों कितनी गंभीरता से निभाता है।
कैंपस से बाहर आते ही प्रश्नपत्र की गोपनीयता भी भंग हुई
मंडी धनौरा। गांव मिठ्ठनपुर के कंपोजिट विद्यालय के स्टाफ की लापरवाही से प्रश्नपत्र की गोपनीयता भी भंग हो गई। भले ही प्रश्नपत्र कक्षा दो का है। नियमानुसार किसी भी परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्र से बाहर नहीं जा सकता है। मिठ्ठनपुर विद्यालय के स्टॉफ की लापरवाही से बच्चों की जान पर बन आने के साथ ही परीक्षा की गोपनीयता भी भंग हो गई। विभागीय अफसरों ने इसका भी संज्ञान लिया है।
- स्कूल समय में शिक्षकों द्वारा बच्चों को स्कूटी देकर बाहर भेजना गंभीर है। मामले में प्रधानाध्यापक और शिक्षक का निलंबन किया गया है। साथ ही बच्चों को स्कूटी देने वाले शिक्षक के विरुद्ध एफआईआर कराने के निर्देश भी बीईओ को दिए गए हैं।
-डॉ. मोनिका, बीएसए