गंगेश्वरी ब्लॉक के गांव आदमपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक दशक पहले स्टाफ के लिए बनाए गए आवासीय भवन खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। इसका खामियाजा स्थानीय मरीजों और स्वास्थ्य सेवाओं को भुगतना पड़ रहा है।
यह आवास, जो कभी स्टाफ को यहीं रहने की सुविधा प्रदान करने के लिए बनाए गए थे। उपयोग में लाए जाने से पहले ही खंडहर की अवस्था में पहुंच गए हैं। इन खंडहर हो चुके आवासों के कारण पीएचसी का अधिकांश स्टाफ व डॉक्टर करीब 20 किलोमीटर दूर संभल से आने को मजबूर हैं। स्टाफ के कुछ सदस्य ही आदमपुर में किराए पर रहते हैं। लंबी दूरी तय करने के कारण अक्सर स्टाफ समय पर पीएचसी नहीं पहुंच पाता, जिससे मरीजों को असुविधा होती है और स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की अनुपस्थिति या देरी के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है, और कई बार तो बिना इलाज के ही लौटना पड़ता है। यह स्थिति ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इन आवासों के निर्माण में लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद, उनका उपयोग न हो पाना सरकारी धन की बर्बादी का एक जीता जागता उदाहरण है।
लोग बोले-
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। इन आवासों की मरम्मत कर उन्हें रहने योग्य बनाना या स्टाफ के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना समय की मांग है। ताकि पीएचसी आदमपुर में स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से चल सकें और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके। - सतीश अग्रवाल, निवासी आदमपुर एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य
- अनदेखी और लापरवाही के चलते पीएचसी में बने आवास खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। इसके चलते चिकित्सक पीएचसी में बने आवास में नहीं रहते हैं। आवास में नहीं रहने से चिकित्सक समय से अस्पताल में नहीं आते हैं। - हरिप्रकाश राणा एडवोकेट गांव चकफेरी
- लाखों रुपये से बने पीएचसी में आवास पूरी तरह से खंडहर हो गए हैं। गांव के लोग पीएचसी के आवास में कूड़ा डालते हैं। आवास खंडहर होने के कारण चिकित्सक आवास में नहीं रहते हैं। इसी के चलते मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। - अरविंद कुमार राजपूत, आदमपुर
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वर्जन
खंडहर हो चुके आवासों की रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी गई है, जैसे ही बजट मिलता है तो खंडहर आवासों की मरम्मत कराकर उन्हें रहने लायक बनाया जाएगा। - डॉ. शशांक चौधरी, सीएचसी रहरा