अमरोहा। ग्राम पंचायतों में शासकीय धनराशि के इस्तेमाल में अनियमितता के मामले में डीएम डॉ. नितिन गौड़ ने सात ग्राम पंचायत प्रशासकों को पद से हटा दिया है। इनमें अमरोहा सदर से सपा विधायक महबूब अली के भाई की पत्नी भी शामिल हैं, जो शकरपुर-समसपुर की प्रशासक थीं। अब संबंधित ग्राम पंचायतों में एडीओ पंचायत को प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई है।
26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नियुक्त प्रशासकों को नए कार्य और धनराशि खर्च करने से पहले डीएम की अनुमति लेना अनिवार्य किया गया था। आरोप है कि जोया ब्लॉक की नौ ग्राम पंचायतों में 27 मई के बाद बिजली फिटिंग, बेसहारा पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, फाॅगिंग, सैनिटाइजेशन व सफाई के नाम पर 26.88 लाख रुपये निकाल लिए गए। ई-स्वराज पोर्टल पर भुगतान और निकासी की जानकारी से मामला सामने आया। डीपीआरओ नितिन कुमार ने एडीओ पंचायत जोया और अमरोहा से जांच कराई, जिसमें दर्शाए गए कार्यों की पुष्टि नहीं हो सकी।
डीएम ने नौ प्रशासकों को नोटिस देकर 15 दिन में स्पष्टीकरण और भुगतान के साक्ष्य मांगे थे। दो ने जवाब दिया, जबकि सात प्रशासकों ने पक्ष नहीं रखा। इसके बाद रजबपुर, शकरपुर-समसपुर, शाहबाजपुर कला, गफ्फारपुर, अटेरना, सूदनपुर और मंगूपुरा के प्रशासकों को हटा दिया गया। संबंधित सचिव मोनू कुमार को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
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जून व जुलाई माह में इन पंचायतों में बगैर अनुमति खर्च हुई धनराशि
रजबपुर पंचायत में 7,52,673 रुपये, शकरपुर समसपुर में 4,06,207 रुपये, सूदनपुर में 2,77,960 रुपये, मंगूपुरा में 2,58,945 रुपये, ईंट का रढ़ा में 2,41,362 रुपये, गफ्फारपुर में 2,30,541 रुपये, अटेरना में 1,91,310 रुपये, शहबाजपुर कला में 1,73,092 रुपये, कूबी में 155914 रुपये खर्च किए गए हैं।
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इन प्रशासनों को पद से हटाया
रजबपुर सुम्बुल जहां, शकरपुर समसपुर हुस्न बानो, शहबाजपुर कला नवनीत कुमार,गफ्फारपुर आशा, अटेरना शीला देवी, सूदनपुर लाल सिंह, मंगूपुरा सर्वेश।
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जिले की 576 ग्राम पंचायतों में की चल रही जांच
अमरोहा। डीएम की अनुमति के बिना ग्राम पंचायतों में धन निकासी के मामले में जिले की सभी 576 ग्राम पंचायतों की जांच शुरू हो गई है। सभी छह ब्लॉकों के एडीओ पंचायत जांच कर रहे हैं। 27 मई से अगस्त तक 66 पंचायतों में दो लाख रुपये से अधिक खर्च सामने आया है।
जांच में अमरोहा की 14, हसनपुर की सात, धनौरा की पांच, गजरौला की आठ, गंगेश्वरी की 20 और जोया की 13 पंचायतें शामिल हैं। अमरोहा की 105 पंचायतों को पंचम वित्त से 95.65 लाख मिले, जिसमें 93.76 लाख और राज्य वित्त के 19.81 लाख में 19.57 लाख खर्च हुए। हसनपुर की 87 पंचायतों में पंचम वित्त के 68.38 लाख में 63.27 लाख और राज्य वित्त के 13.11 लाख में 9.12 लाख खर्च किए गए। धनौरा में 41.63 लाख में 40.75 लाख, गजरौला में 81.71 लाख में 80.61 लाख तथा राज्य वित्त के 13.70 लाख में 13.59 लाख खर्च हुए। गंगेश्वरी और जोया में भी अधिकांश धनराशि खर्च हुई है। अधिकारियों के मुताबिक 66 पंचायतों के अलावा अन्य पंचायतों में भी धन निकासी हुई है। सभी पंचायतों में निकाली गई धनराशि और उसके उपयोग की जांच की जा रही है। संवाद
बिना अनुमति धन निकासी पर 78 सचिवों को दिया जा चुका नोटिस
अमरोहा। ग्राम पंचायतों में डीएम की अनुमति के बिना धनराशि निकालने के मामले में 78 ग्राम पंचायत अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। पांच सितंबर को जारी नोटिस में एक सप्ताह में जवाब मांगा गया था। कई सचिवों की समयसीमा पूरी होने वाली है। तय समय में जवाब न देने पर कार्रवाई की जाएगी। बिना अनुमति निकाली गई धनराशि की जांच सभी ब्लॉकों के एडीओ पंचायत कर रहे हैं। सचिवों से धनराशि किस मद में और किसकी अनुमति से निकाली गई, इसका ब्योरा मांगा गया है। पुराने या नए कार्यों पर हुए खर्च की जानकारी भी मांगी गई है। डीपीआरओ नितिन कुमार ने बताया कि जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। समय पर जवाब न देने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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फागिंग से हैंडपंप मरम्मत तक, तीन कामों पर 5.50 करोड़ खर्च
अमरोहा। जिले की 576 ग्राम पंचायतों में प्रशासकों और सचिवों ने तीन माह में करीब 5.50 करोड़ रुपये हैंडपंप रिबोर व मरम्मत, फागिंग और सैनिटाइजर छिड़काव पर खर्च किए। शिकायतों के बाद ई-स्वराज पोर्टल की जांच में इसका खुलासा हुआ। फागिंग पर करीब 2.20 करोड़, सैनिटाइजर पर 80 लाख से अधिक और हैंडपंप रिबोर व मरम्मत पर करीब 2.50 करोड़ रुपये खर्च किए गए। कुछ खास फर्मों से ही काम कराने की शिकायतें भी विभाग को मिली हैं। डीपीआरओ नितिन कुमार ने बताया कि करोड़ों की निकासी में गड़बड़ी की आशंका पर सभी ब्लॉकों के एडीओ पंचायत को जांच के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, 20 हजार रुपये तक की धनराशि निकालने के लिए अनुमति जरूरी नहीं है। संवाद
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यह है ग्राम पंचायतों में धन खर्च करने की व्यवस्था
अमरोहा। प्रमुख सचिव पंचायतीराज के कार्यालय से 25 मई 2026 को जारी आदेश में ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की ओर से धन खर्च करने की व्यवस्था स्पष्ट की गई थी। आदेश के बिंदु-03 (1) के अनुसार, प्रशासक नियुक्त होने से पहले स्वीकृत, अनुमोदित, दैनिक, निर्माणाधीन, मरम्मत और पूर्ण हो चुके कार्यों का भौतिक व तकनीकी मूल्यांकन कराकर उनका भुगतान पूर्व की भांति किया जा सकता है। वहीं प्रशासक की नियुक्ति के बाद किसी नए कार्य को शुरू करने से पहले जिला पंचायतराज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी से स्वीकृति लेना अनिवार्य है। यानी पुराने स्वीकृत कार्यों का भुगतान किया जा सकता है, लेकिन प्रशासक नियुक्त होने के बाद नए कार्यों पर खर्च करने से पहले डीएम की अनुमति जरूरी है।
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27 मई के बाद डीएम के अनुमोदन के बिना शासकीय धनराशि आहरित करने, वित्तीय अनियमितता और गबन की आशंका के साथ कुछ प्रशासकों द्वारा दायित्वों का संतोषजनक निर्वहन न करने और पद के दुरुपयोग का मामला सामने आया था। नौ प्रशासकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन 11 सितंबर तक सात ने जवाब नहीं दिया। इसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। ईंट का रढ़ा के प्रशासक भगवान सिंह और कूबी की प्रशासक कुसुम देवी ने जवाब दाखिल किया है। दोनों ने प्रस्ताव के बाद ही धनराशि निकालने के साक्ष्य दिए हैं।
-नितिन कुमार, जिला पंचायतराज अधिकारी