Said Javed Anwar: Remembering the situation in Ukraine, the soul trembles
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यूक्रेन में खौफनाक मंजर के बीच माइनस छह डिग्री टेंपरेचर में पांच दिन बिताने के बाद जोया निवासी जावेद अनवर खान सकुशल घर लौट आए हैं। बेटे को रिसीव करने खुद माता-पिता दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच गए। बेटे की झलक पाकर उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। आंखों से खुशी के आंसू छलक उठे। मां ने बेटे को गले लगा कर दुलारा। बातचीत के दौरान जावेद अनवर खान ने बताया कि यूक्रेन के हालात को याद कर रूह कांपती उठती है। हर समय डर बना रहता था। गनीमत रही की टर्नोपिल शहर पश्चिम दिशा में था, यहां हालात ठीक है। लेकिन कब कहां क्या हो जाए, बस यही डर बना रहता था। कीव और खारकीव में फंसे साथी छात्र वहां की तबाही का मंजर बताते थे। हर समय सुरक्षित घर पहुंचने की चिंता रहती थी।
एमबीबीएस में पहले साल की पढ़ाई कर रहे जावेद अनवर खान ने बताया कि उन्होंने अपने निजी खर्चे पर होटल से 65 हजार रुपये में बस किराए पर की थी। यूनिवर्सिटी प्रबंधन की तरफ से स्पष्ट निर्देश थे कि जो भी छात्र निकल रहे हैं, वह अपनी बसों के आगे तिरंगा लगाकर निकले, उन्हें कोई दिक्कत नहीं आएगी। बीस छात्रों के ग्रुप ने 220 किलोमीटर बस का सफर किया। इसके बाद 12 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे थे। लेकिन तीन दिन तक बॉर्डर पर फंसे रहे। यहां यूक्रेन सैनिकों ने भारतीय छात्रों के साथ गलत बर्ताव किया। बॉर्डर पार कराने में यूक्रेनी नागरिकों को प्राथमिकता दी गई। चेकिंग के नाम पर बेवजह परेशान किया गया। वह भारतीय छात्रों को सपोर्ट नहीं कर रहे थे। माइनस छह डिग्री टेंपरेचर के बीच पांच दिन बॉर्डर पर काटने पड़े। जावेद अनवर ने बताया कि जब भारतीय दूतावास की तरफ से मैसेज मिला कि आपको एयरपोर्ट के लिए निकलना है आप तैयार रहें, तो खुशी का ठिकाना न रहा। जावेद अनवर शुक्रवार की सुबह 6:30 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे। यहां पहले से उनके इंतजार में खड़े पिता अफसर अली, मां नसीम खानम और बड़े भाई फिरोज अनवर खान को देखकर जावेद अनवर भावुक गए। दौड़ कर मां नसीम खानम के गले लग गए। परिजनों की आंखों से भी खुशी के आंसू छलक उठे। इसके बाद परिजन जावेद अनवर को लेकर उनकी नानी के घर पहुंचे। जावेद अनवर ने बताया कि अब घर आ गया हूं, इसकी उन्हें बहुत खुशी है। अब हालातों को देखकर ही वापस जाने के लिए निर्णय लेंगे।