यूं तो बान नदी का अस्तित्व बहुत पुराना है। मशहूर शायर जोन एलिया ने भी अपनी शायरी में इस बान का जिक्र कर दुनियाभर में इसका नाम किया, लेकिन समय के साथ नदी का स्वरूप गुम होता चला गया। कई गांवों में नदी नाले के रूप में तब्दील हो गई तो कई गांव इसकी जमीन पर कब्जा कर खेती होने लगी। नदी को इसके पुराने स्वरूप में लाने के लिए अमर उजाला ने मुहिम शुरू की तो इसके जीर्णोद्धार की आस जगने लगी। प्रशासन और विकास विभाग ने भी संज्ञान लेते हुए नदी का पुराना स्वरूप वापस लाने के लिए अधीनस्थों को निर्देश दे दिए।
डीएम निधि गुप्ता वत्स ने एसडीएम को नदी की पैमाइश कराते हुए कब्जा हुई जमीन को खाली कराने को कहा तो, सीडीओ अश्वनी कुमार मिश्रा ने संबंधित बीडीओ को सर्वे करने के निर्देश दिए थे। सर्वे रिपोर्ट में कई गांवों में नदी की जमीन पर फसले खड़ी होने व झाड़ियां उगी होने का जिक्र किया गया था। बुधवार को डीएम के निर्देश पर नदी की सफाई व खोदाई का काम शुरू हो गया।
अमरोहा के गांव बाकीपुर, शाहिदपुर से इसकी शुरुआत की गई। बीडीओ नीरज गर्ग के निर्देशन में शुरू हुए सफाई अभियान में नदी में खड़ी झाड़ियों को साफ करते हुए खोदाई का काम कराया गया। जिसमें बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूरों ने काम किया। सफाई अभियान की शुरुआत बाकीपुर के प्रधान पति रिजवान हैदर व शाहिदपुर के प्रधान पति राजीव चौहान ने नारियाल तोड़कर की।
इस दौरान सहायक विकास अधिकारी पंचायत मदनपाल सिंह, एपीओ ब्रजभान सिंह, योगेंद्र सिंह, शाहिदपुर के पंचायत सचिव जयकिशोर व बाकीपुर की पंचायत सचिव पुष्पा देवी आदि मौजूद रहे।
जनपद में 47 किलोमीटर लंबी है बान
राजस्व विभाग के मुताबिक जिले में बान नदी की लंबाई करीब 47 किलोमीटर है। यह नदी बिजनौर जनपद से नौगांवा सादात क्षेत्र के शिकरिया से अमरोहा जिले में प्रवेश करती है। जिले में यह नदी करीब तीस से अधिक गांवों से होकर गुजरती है।
नदियों को पुर्नजीवन देने के लिए अमर उजाला की पहल सराहनीय है। नदी को उसके पुराने स्वरूप में लाने के लिए काम किया जाएगा। संबंधित एसडीएम को नदी की पैमाइश कराने के निर्देश भी दिए हैं। नदी की जमीन पर हो रहे कब्जों को खाली कराया जाएगा।
- निधि गुप्ता वत्स, डीएम
बान नदी को उसके पुराने स्वरूप में लाने के लिए काम शुरू किया गया है। जल संरक्षण के लिए अमर उजाला की यह सकारात्मक पहल है। नदी की सफाई के लिए सर्वे का काम पूरा हो गया है। जहां से नदी गुजर रही है, वहां पंचायतों को एस्टीमेट बनवाने के लिए कहा गया है। जब तक नदी को उसका पुराना स्वरूप नहीं मिल जाएगा। तब तक सफाई व खोदाई का काम जारी रहेगा।
- अश्वनी कुमार मिश्रा, सीडीओ