अमरोहा। कहावत है कि जमीन और पैसा इंसान को हैवान बना देता है। आदमी पैसे और जमीन के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता है। करीब साढ़े 13 साल पहले मोहल्ला छेबड़ा में ऐसी ही घटना घटी। जमीन के विवाद को सुलझाने के लिए बैठी पंचायत में दो सगे भाइयों को गोलियों से डाला था। दोनों परिवारों के खूनी संघर्ष से मोहल्ला ही नहीं शहर भी दहल उठा था। दोहरे हत्याकांड के 22 दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली तो मृतकों के पांच परिजनों को हत्या की कोशिश के मामले में दस-दस साल की कैद हुई। बावनखेड़ी नरसंहार के बाद जिले की यह दूसरी बड़ी वारदात थी।
24 सितंबर 2011 को रात साढ़े नौ बजे नगर कोतवाली के मोहल्ला छेबड़ा में जमीनी विवाद को चल रही पंचायत में जुल्फेकार के बेटे युनूस व मुरसलीन को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया था। साथ ही हमलावरों ने जुल्फेकार, इरशाद, उजमा और सायमा को घायल कर दिया था। घटना को अंजान देने वालों में मोहल्ले के ही सलीम, तहसीन, तसलीम, मुकीम, यामीन कबाड़ी, मुस्तकीम, समी, सरफराज, कमरू, महराब, सिराज, मिस्बाहउद्दीन, इसरार, निसार, अहसान, फैसल, सरदार, शाकिर, शाहिद, इरफान, इस्लाम, असलम व सज्जाद शामिल थे।
मामले में जुल्फिकार की ओर से यासीन कबाड़ी समेत 24 लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। बाद में पुलिस ने आरोपियों जेल भेज दिया था। इस मामले में 27 अप्रैल 2017 को दोहरे हत्याकांड में नामजद को आजीवन कारावास और 21-21 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों से आला कत्ल बरामद किया था। जिसमें मिस्बाहउद्दीन, समी, तस्लीम, मेहराब और सरफराज शामिल थे। जबकि हत्यारोपी पक्ष के सलीम की तहरीर पर पुलिस ने जुल्फेकार, मुन्ना उर्फ करीम, गफ्फार, आफताब व अहसान के खिलाफ जानलेवा हमले का मुकदमा दर्ज कराया था।
न्यायालय ने हत्या की कोशिश में मृतकों के पिता जुल्फेकार, मुन्ना उर्फ करीम, गफ्फार, आफताब व अहसान को दस-दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी और आठ-आठ हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।
स्पेशल जज ने सुनाया था ऐतिहासिक फैसला
स्पेशल जज का 22 दोषियों को हत्याकांड में सुनाया गया उम्रकैद और पांच को दस साल की सजा का फैसला वाकई चौंकाने वाला था। इससे पहले या अभी तक इतनी बड़ी संख्या में किसी केस में इतने दोषियों को सजा नहीं सुनाई गई है। यह पहला केस था। सभी दोषियों को सजा सुनाने के बाद जेल भेजने की कार्रवाई की गई थी। सजा सुनने के बाद जैसे ही दोषी कोर्ट से बाहर निकले वैसे ही उनके परिजनों का धैर्य टूट गया था। अपनों को देखते ही आंखों से बरबस आंसू टपकने लगे थे।
एक कुनबे के 22 लोगों को सजा से रहा था सन्नाटा
दोषियों को सजा मिलने के बाद जहां उनके परिवार के लोगों पर दुखों का पहाड़ टूटा, वहीं मोहल्ला छेवड़ा में भी सन्नाटा पसर गया था। एक ही कुनबे के 22 लोगों को सजा से बस्ती में तरह-तरह की चर्चाएं चलीं। बच्चों से लेकर बड़ों तक के चेहरे पर मायूसी और बेचैनी नजर आई रही थी। जिस बेशकीमती जमीन को लेकर मोहल्ला छेवड़ा में 24 सितंबर 2011 की रात पंचायत चल रही थी, वह जमीन तो अभी वहीं है। विवाद बरकरार है, लेकिन जमीन के चक्कर में कई परिवारों की खुशियां रूठ गई हैं। पंचायत में ऐसी घटना हुई, जिसको कोई परिवार नहीं भुला सकता। जमीन के चक्कर में हुआ कत्लेआम आज भी मुरसलीन व यूनुस के परिजनों के दिलों को झकझोर देता है। घर की छत पर खून से लथपथ पड़ी लाशें और चीख पुकार उनके कानों में बार-बार सुनाई देती हैं। सजा के बाद बड़े ही नहीं घर के मासूम बच्चों के चेहरों पर भी खामोशी साफ नजर आ रही थी।
छावनी में तब्दील हो गई थी कचहरी
शहर के चर्चित दोहरे हत्याकांड में 20 अप्रैल 2017 को न्यायालय ने सभी को दोषी करार दिया था। जबकि 27 अप्रैल 2017 को सभी को सजा सुनाई गई। सजा सुनाए जाने से पहले ही न्यायालय परिसर छावनी में तब्दील कर दिया गया था। चारों तरफ पुलिस ही पुलिस दिखाई दे रही थी। दोनों पक्षों को कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय में पेश किया गया और सजा सुनाई जाने के बाद जेल भेजने तक सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही थी।
19 दोषियों को हाईकोर्ट से मिल गई थी जमानत
दोनों पक्षों ने स्थानीय अदालत के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस दौरान एक हत्यारोपी की जेल में मौत हो गई। इसके बाद हत्या के दोषियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 22 दोषियों में से 19 को जमानत दे दी है। इस मामले में केवल सलीम और शमी को जमानत नहीं मिल सकी थी।