अमरोहा। अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। अमरोहा में एक गांव ऐसा भी है जहां जन्मे रामफल सिंह नागर ने विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष रहे स्वर्गीय अशोक सिंघल के साथ मिलकर कारसेवकों का नेतृत्व किया था। उन्होंने उत्तर प्रदेश में बीस हजार से भी ज्यादा कारसेवकों को जोड़ा था।
रामफल सिंह नागर का जन्म जिला मुख्यालय से सात किलोमीटर दूर मऊ मय चक में अगस्त 1934 को दलसिंह के घर में हुआ था। पढ़ाई के दौरान वर्ष 1946 में उनका संपर्क राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अशोक सिंघल से हुआ। वह शादी से कुछ दिन पहले ही घर छोड़कर संघ के प्रचारक बन गए और फिर 20 साल बाद घर लौटे। उस दौर में रामफल सिंह नागर जिला मुरादाबाद से निकलने वाले पहले प्रचारक (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) थे। वह सहारनपुर, रुड़की, बाराबंकी विभाग प्रचारक रहे। 1991 में उन्हें विश्व हिन्दू परिषद के कार्य में भेजा गया।
शुरुआत में वह उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के संगठन मंत्री रहे। उत्तर प्रदेश में रामफल सिंह नागर ने अशोक सिंघल के साथ रामजन्म भूमि आंदोलन की रणनीति तय की थी। वर्ष 1992 में कारसेवकों का नेतृत्व अशोक सिंघल और उनके साथ रामफल ने किया था। कुछ वर्ष बाद रामफल सिंह नागर को विश्व हिन्दू परिषद का केन्द्रीय मंत्री और सामाजिक समरसता आयाम का प्रमुख बनाकर दिल्ली बुला लिया गया। लेकिन 9 जून 2010 को रामफल सिंह नागर का निधन हो गया। गांव मऊमय चक में उनके भतीजे वेदप्रकाश सिंह, जयप्रकाश सिंह, राजकुमार सिंह, अजीत सिंह, सुभाष सिंह, वरन सिंह, बदन सिंह, ऋषिपाल सिंह, पोते मनीष नागर अयोध्या में 22 जनवरी को भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा लेकर काफी उत्साहित हैं।
रामफल सिंह नागर ने ये किताबें लिखीं
अमरोहा। रामफल सिंह नागर ने देशभर में शोध के दौरान छह से अधिक किताबें लिखीं। जिसमें छुआछूत गुलामी की देन है, आदिवासी या जनजाति, मध्यकालीन स्वतंत्रता सेनानी, सिद्ध संत गुरु रविदास, प्रखर राष्ट्रभक्त डाॅ. भीमराव आम्बेडकर समरसता के सूत्र, घर के दरवाजे बन्द क्यों, सोमनाथ से अयोध्या-मथुरा-काशी और मध्यकालीन धर्मयोद्धा शामिल हैं। मध्यकालीन धर्मयोद्धा उनकी बहुचर्चित किताबों में से एक हैं। जबकि सोमनाथ से अयोध्या-मथुरा-काशी भी काफी चर्चित किताब रही।
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दादा के नक्शे कदम पर पोते मनीष नागर
अमरोहा। दादा रामफल सिंह नागर की निधन के बाद उनके बड़े भाई अतर सिंह के बड़े बेटे वेदप्रकाश सिंह के बेटे मनीष नागर भी उनके नक्शेकदम पर हैं। उनकी प्रेरणा पर मनीष नागर संघ से जुड़कर देशहित में कार्य कर रहे हैं। मनीष नागर ने दादा रामफल की प्रेरणा लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में 10 साल तक दिल्ली प्रांत में जिला प्रचारक रहे हैं। मनीष नागर ने भी प्रचारक रहते हुए राम मंदिर से जुड़े कई आंदोलन में हिस्सा लिया।
हमारे जनपद के गांव मऊमय चक के रहने वाले रामफल सिंह नागर संघ के वरिष्ठ प्रचारक रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल और रामफल सिंह नागर ने ही श्री रामजन्मभूमि आंदोलन के लिए कारसेवकों का नेतृत्व किया था। ऐसे महानुभावों की वजह से आज अयोध्या में नया अध्याय लिखा जा रहा है।
-गिरीश त्यागी, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा
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