गुजरे जमाने में तालाब जल संचयन का प्रमुख स्रोत हुआ करते थे। इनमें गांवों का पानी इकट्टा होता था, जिसको सिंचाई में भी इस्तेमाल कर लिया जाता था, लेकिन समय बदला तो तालाबों का स्वरूप भी बदलने लगा।
यूं तो राजस्व अभिलेखों में जिले में तालाबों की संख्या करीब पांच हजार है, लेकिन कई जगह तालाबों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। तालाबों को पाटकर या तो भवनों का निर्माण कर लिया गया या कहीं कब्जा कर खेती की जा रही है। तालाबों को संरक्षित के करने के लिए शासन लगातार प्रयास कर रहा है।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की धरोहर इन तालाबाें को बचाए जाने के लिए स्थानीय प्रशासन भी लगातार मुहिम चलाता है, लेकिन इसके बाद भी तालाबों पर लगातार कब्जे करने के मामले सामने आते रहे हैं। विकास की दौड़ में पुरानी धरोहरें पीछे छूट गई और उनका अस्तित्व ही सिमटने लगा। यहीं वजह है कि तालाबों का दायरा भी सिमटने लगा है।
तालाबों को पाटकर बड़े-बड़े भवन खड़े कर दिए गए है, तो कहीं कब्जा कर फसलें बोई जा रही हैं। पुराने समय में यही तालाब गांवों के पानी की निकासी और जल संचयन के प्रमुख स्रोत हुआ करते थे, लेकिन इनके खत्म होने से गांवाें में पानी की निकासी की समस्या बढ़ गई है। इसी कारण कई गांवों में घरों से निकलने वाला पानी सड़कों पर ही भरा है, जिससे गंदगी तो बढ़ती ही है। साथ ही बीमारी फैलने का खतरा भी बना रहता है।
कई तालाबों पर माफिया की नजर
ऐसा नहीं है कि अमरोहा में तालाबों की संख्या कम है। फिलहाल भी राजस्व अभिलेखों के अनुसार जिले में करीब पांच हजार से अधिक तालाब हैं। जिनमें लगभग 150 से अधिक तालाबों पर भूमाफियों का कब्जा हो चुका है। अमरोहा में कई पुराने तालाब थे। जहां पूरे शहर का पानी इकट्ठा होता था. लेकिन धीरे-धीरे कब्जा होने के बाद तालाबों की जमीनों पर मकान खड़े हो गए। जिसकी वजह से जलनिकासी की समस्या पैदा हो गई। जिसके कारण हल्की बारिश में भी यहां सड़कें पानी से लबालब भर जाती हैं।
कभी गांवों में लोगों के जीवन का जरूरी हिस्सा होते थे तालाब
कभी तालाब ग्रामीण जनजीवन का एक जरूरी हिस्सा हुआ करते थे। पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ, वे उनके सामाजिक ताने-बाने से भी जुड़े थे। धार्मिक और पेयजल दोनों उद्देश्यों के लिए उनका सम्मान किया जाता था और उन्हें बनाए रखने की हरसंभव कोशिश भी। लेकिन, तालाब धीरे-धीरे गायब होने लगे हैं। तालाबों पर अतिक्रमण कर लिया गया। जहां पहले तालाब थे, वहां अब इमारतें, घर, खेल के मैदान या कूड़े के ढेर हैं। बढ़ते जल संकट के साथ बदलते परिवेश में गांव के तालाबों का संरक्षण और पुनरुद्धार जरूरी हो गया है।
विधायक ने भी उठाया था तालाब पर कब्जे का मुद्दा
तालाबों पर अवैध कब्जे की शिकायतें डीएम और सीडीओ के समक्ष आती रही हैं। वहीं, नौगांवा सादात विधायक समरपाल सिंह ने भी गांव बीलना स्थित तालाब पर अवैध कब्जे का मुद्दा विधानसभा में उठाया था। जिसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तालाब की सफाई आदि भी कराई थी।
तालाबों को सहेजने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सभी पंचायतों में तालाबों की साफ-सफाई कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। कई पंचायतों में काम भी चल रहा है।
- अश्वनी कुमार मिश्रा, सीडीओ