बिजली की झंझटों से राहत दिलाने के लिए पिछले साल पीएम सूर्यघर योजना की शुरुआत की गई थी। इसके लिए शुरुआत में 25 हजार बिजली उपभोक्ताओं को योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था। शुरू में योजना को लेकर काफी गंभीरता दिखाई गई। जागरूकता शिविरों का भी आयोजन किया गया। लगातार योजना को लेकर समीक्षा बैठक भी हुई, लेकिन इसका लाभ बिजली उपभोक्ताओं तक योजना को पहुंचाया न जा सका। यही वजह रही कि जिले में कुल 15 हजार बिजली उपभोक्ताओं ने योजना के तहत सोलर पैनल लगवाए जाने के लिए अपना पंजीकरण तो कराया, लेकिन इनमें से वेंडर का सलेक्शन केवल एक हजार उपभोक्ताओं ने ही किया। वहीं, कुल 257 उपभोक्ताओं ने ही अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगवाए। यानी लक्ष्य का लगभग एक फीसदी उपभोक्ता ही योजना का लाभ ले सके हैं।
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किलोवाट के आधार पर छूट का प्रावधान
योजना के तहत एक किलोवाट तक सोलर सिस्टम के लिए 75 प्रतिशत सब्सिडी दी जानी है। इसमें 50 प्रतिशत केंद्र सरकार और 25 प्रतिशत प्रदेश सरकार की सब्सिडी का प्रावधान है। इसी तरह तीन किलोवाट के सोलर सिस्टम के लिए 60 प्रतिशत, पांच किलोवाट के सोलर सिस्टम में 36 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। इसके अलावा उपभोक्ता को किश्तों में भी जमा कराने की सुविधा दी जाती है।
स्टेट की सब्सिडी मिलने भी हो रही देरी
योजना के तहत केंद्र व राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाती है, लेकिन इससे पहले उपभोक्ताओं से पूरी धनराशि जमा कराई जाती है। इसके बाद ही सब्सिडी खातों में पहुंचती है। योजना के वेंडर चिकारा इंटरप्राइजेज के स्वामी आशीष चिकारा का कहना है कि योजना के तहत प्रदेश से मिलने वाली सब्सिडी काफी समय से खातों में नहीं पहुंच रही है, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इसके अलावा कंपनी से मिलने वाले सामान की आपूर्ति में भी देरी हो रही है। पहले जहां धनराशि जमा करने के बाद चार से पांच दिन में काम शुरू कर दिया जाता था। वहीं अब सामान निर्धारित समय से न मिलने के कारण एक माह से अधिक का समय लग जा रहा है, जिससे उपभोक्ता इससे दूरी बनाने लगे हैं। उन्होंने बताया कि योजना के क्रियान्वयन को बिजली विभाग का भी पूरा सहयोग नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी फर्म द्वारा जिले में योजना के तहत करीब 187 रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं।
यह है पीएम सूर्यघर योजना
- घरेलू स्वीकृत बिजली कनेक्शन के समान ऑनग्रिड सोलर रूफटॉप लगाया जाएगा।
- एक से लेकर 10 किलोवॉट तक कनेक्शन की सुविधा।
- एक किलोवॉट रूफटॉप पैनल प्रतिदिन औसतन चार से पांच यूनिट बिजली का उत्पादन करता है
- रूफटॉप सोलर पैनल से बनी बिजली ग्रिड में चली जाती है, जिसका नेट मीटरिंग के बाद बिल में समायोजन होता है।
- इसके लिए वेबसाइट http://pmsuryaghar.gov.in आवेदन किया जा सकता है।
इतना मिलता है अनुदान
क्षमता - कुल लागत - अनुदान
एक किलोवाट - 65000 - 45000
दो किलोवाट - 130000 - 90000
तीन किलोवाट - 180000 - 108000
चार किलोवाट - 240000 - 108000
पांच किलोवाट - 275000 - 108000
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पीएम सूर्यघर योजना का नोडल नेडा है। योजना के तहत सब्सिडी बाद में मिलने के कारण भी अधिकांश उपभोक्ता नहीं जुड़ पा रहे हैं। फिर भी योजना के क्रियान्वयन के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। -संजय कुमार शर्मा, अधीक्षण अभियंता बिजली विभाग
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योजना के क्रियान्वयन को लेकर लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। शिविरों का आयोजन कर इसके लाभ भी गिनाए जा रहे हैं। योजना से बिजली उपभोक्ताओं को जोड़ने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।- चंद्रप्रकाश वर्मा, वरिष्ठ परियोजना निदेशक, यूपीनेडा