अमरोहा। नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही महंगे कोर्स और फीस को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ती जा रही है। सत्र शुरू होते ही किताबों, कोर्स, ड्रेस और अन्य खर्चों का बोझ परिवारों के बजट को प्रभावित कर रहा है। अभिभाव महंगी शिक्षा के जाल में बुरी तरह फंसे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में बच्चों की शिक्षा का खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है। उनका आरोप है कि स्कूलों द्वारा एक ही दुकान से कोर्स खरीदने की बाध्यता बनाई जाती है, जिससे उन्हें महंगे दामों पर किताबें खरीदनी पड़ती हैं। हर साल कोर्स की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी भी की जा रही है, जिससे परेशानी और बढ़ गई है।
अभिभावकों ने मांग की है कि महंगे कोर्स पर नियंत्रण लगाया जाए और उन्हें बाजार से कहीं से भी किताबें खरीदने की स्वतंत्रता दी जाए। उनका कहना है कि जिस तरह एनसीईआरटी की किताबें सस्ती उपलब्ध होती हैं, उसी तरह अन्य स्कूलों के कोर्स भी किफायती होने चाहिए, ताकि हर वर्ग के लोग अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला सकें। इसके अलावा निजी स्कूलों में एडमिशन फीस, यूनिफॉर्म और परिवहन शुल्क भी महंगे हैं। कई स्कूल हर साल यूनिफॉर्म में बदलाव कर उसे अनिवार्य कर देते हैं, जिससे अभिभावकों को नई ड्रेस खरीदनी पड़ती है। कुछ स्कूलों में सप्ताह में अलग-अलग ड्रेस का नियम भी लागू किया गया है, जिससे खर्च और बढ़ जाता है।
अभिभावकों ने जिलास्तर पर एक निगरानी समिति गठित करने की मांग की है, जो स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाए और उनकी समस्याओं का समाधान करे। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि शिक्षा सभी के लिए सुलभ और सस्ती बन सके।