अमरोहा। जीवित किशोरी को मृत दर्शाकर पिता, भाई और रिश्तेदार को ऑनर किलिंग में जेल भेजने वाले तत्कालीन आदमपुर इंस्पेक्टर (बरेली के आंवला थाने में तैनात) अशोक कुमार शर्मा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुए हैं। अब इंस्पेक्टर के हाजिर नहीं होने पर विवेचक न्यायालय से उनकी कुर्की की अनुमति लेने की तैयारी में है।
हाईकोर्ट ने इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। साथ ही पूरे प्रकरण में उन्हीं को दोषी माना है। जबकि नामजद दस पुलिस कर्मियों को जमानत मिल चुकी है। पुलिस की विभागीय जांच में भी सभी पुलिसकर्मी दोषी पाए गए हैं। दोषी ठहराए गए 11 में से एक दरोगा की सेवानिवृत्ति हो चुकी है। 28 दिसंबर 2019 को किशोरी के पिता, भाई और एक रिश्तेदार को किशोरी का हत्यारा बताकर जेल भेज दिया था। तर्क दिया था कि किशोरी के गलत संगत में पड़ने पर परिवार ने इज्जत बचाने के लिए उसकी गोली मारकर हत्या कर दी और बाद में शव गंगा में बहा दिया। इस झूठी कहानी के दम पर षड्यंत्रकारी पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही थी।
सात अगस्त 2020 को किशोरी के जिंदा होने की जानकारी सामने आ गई। किशोरी अपने गांव से आठ किलोमीटर दूर प्रेमी के गांव में सुरक्षित मिली। खुलासा हुआ कि प्रेमी के साथ शादी करके वह पत्नी के रूप में रह रही थी।
इसका पता चलते ही पुलिस ने यू-टर्न लेकर प्रेमी से किशोरी के पति बने युवक को अपहरण और नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। दूसरी ओर यह सच अदालत तक पहुंचा तो किशोरी के पिता, भाई और रिश्तेदार को जेल से रिहाई मिली थी। अदालत की कड़ी टिप्पणी के बाद विवेचना से लेकर खुलासे तक में शामिल रहे इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा, एसआई मोहम्मद आरिफ, एसआई राकेश कुमार, एसआई मनोज कुमार, एसआई विनोद कुमार त्यागी, सिपाही भूपेंद्र सिंह, सिपाही कृष्णवीर सिंह, सिपाही अनिरुद्ध, सिपाही दीपक कुमार, महिला सिपाही अपेक्षा तोमर व महिला सिपाही निधि के खिलाफ के मुकदमा दर्ज हुआ था।नामजदों में शामिल दरोगा विनोद कुमार त्यागी के सेवानिवृत्त हो जाने के कारण शेष दस पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था। विवेचक इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार ने बताया कि आरोपी इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा की तैनाती बरेली के आंवला थाने में है लेकिन ढाई महीने से वह गैर हाजिर चल रहे हैं।