जिले में मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल मजाक बन गए हैं। यहां न तो कभी थ्योरी समझाई और न ही ट्रेनिंग दी गई। अनुभवी प्रशिक्षक भी नहीं। बगैर ट्रेनिंग दिए ही चालकों को प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। यहां तक जिन वाहनों से ट्रेनिंग दी जानी है, उनकी हालत खस्ता है। कई महीनों से वाहन अपनी जगह से जरा भी टस से मस नहीं हुए हैं।
वाहनों के नीचे घास जम आई है। अनुभवी प्रशिक्षक भी स्कूलों में नहीं है। न ही तकनीकी योग्यता उनके पास है। मानकों की कसौटी पर फेल इन स्कूलों पर अफसरों की दरियादिली रहमत बनकर बरस रही है। अमर उजाला टीम ने ट्रेनिंग स्कूलों की स्थिति देखी तो किसी का वाहन ओवरब्रिज के नीचे तो किसी का सड़क किनारे स्कूली जगह में खड़ा धूल फांक रहा था। बावजूद इसके जिम्मेदारों का कहना था कि रोजाना ट्रेनिंग दी जाती है।
वीएन खरे बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 16 दिसंबर 1997 को व्यवसायिक वाहन चलाने वाले चालकों के लिए मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल में विशेष प्रशिक्षण, जिसकी अवधि कम से कम 30 दिन पूर्ण करने के उपरांत ही लाइसेंस जारी करने के आदेश दिए गए थे, जिसमें यूपी के भीतर केंद्रीय मोटरयान अधिनियम 1988 व केंद्रीय मोटरयान नियमावली 1989 के तहत स्थापित मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल संचालित हैं।
जनपद में तीन स्कूल चल रहे हैं। इनमें गणेश मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल, जनता मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल व महादेव मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल शामिल हैं, जिनकी हालत चौंकाने वाली है। इन स्कूलों की न तो जांच की जाती है न ही नियमानुसार वाहनों की ड्राइविंग कराई जाती है। सीधे-सीधे प्रशिक्षण प्रमाण पत्र बिक्री किए जाते हैं।
मोटरयान अधिनियम के तहत मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों के पास मोटर यांत्रिक प्रशिक्षण प्राप्त अनुभवी प्रशिक्षक होना चाहिए। उसके पास तकनीकी योग्यता का न्यूनतम शैक्षिक प्रमाण पत्र भी होना चाहिए, परन्तु किसी भी स्कूल में ऐसा नहीं है। मान्यता के बाद इन स्कूलों से अयोग्य व्यक्तियों को व्यवसायिक वाहनों का चालक लाइसेंस जारी कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है।
क्या कहना है संचालकों का
जनता मोटर ट्रेनिंग स्कूल के संचालक के भाई बब्बू, महादेव मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल के संचालक कावेंद्र और गणेश मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल के भीम सिंह का कहना था कि स्कूल में जो भी वाहन हैं, रनिंग अवस्था में है। रोजाना एक दो चालकों को ट्रेनिंग दी जाती है। अधिकारियों ने निरीक्षण किया था, जिसमें सबकुछ सही पाया गया था। अब काम मंदा चल रहा है।
रोज कितने लोग आते हैं, इसकी सही स्थिति रजिस्टर देखने के बाद ही बताऊंगा।
मोटर ट्रेनिंग स्कूलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया जाएगा। वाहनों की स्थिति भी देखी जाएगी। यदि कहीं कुछ गड़बड़ मिला तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पहले आरआई स्कूलों का निरीक्षण करते थे। उनका तबादला हो गया है।
हिमेश तिवारी, एआरटीओ