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Amroha News: शिक्षामित्र की हत्या में पत्नी समेत तीन को उम्रकैद

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अमरोहा।
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छह साल पहले शिक्षामित्र प्रेम कुमार की हत्या कर आत्महत्या दर्शाने के मामले में कोर्ट ने पत्नी और उसके प्रेमी समेत तीन को उम्रकैद की सजा सुनाई है। न्यायालय ने तीनों दोषियों पर 42 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। एक आरोपी की मौत हो चुकी है। फिलहाल, दोषी जमानत पर बाहर थे। कोर्ट का फैसला आने के बाद तीनों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है।

हत्या की यह वारदात हसनपुर क्षेत्र के जयतौली गांव में हुई थी। गांव निवासी प्रेम कुमार शिक्षामित्र थे। 29 अक्तूबर 2018 की रात 11 बजे शिक्षामित्र प्रेम कुमार का शव घर के कमरे में फंदे पर लटकता मिला था। उनके घुटने मुड़े थे। पत्नी बबीता रानी ने आत्महत्या करने की बात कहते हुए शिक्षामित्र के शव का अंतिम संस्कार करने की तैयारी शुरू कर दी थी। लेकिन, मौके पर पहुंची पुलिस ने शक के आधार पर पोस्टमार्टम कराया, जिसमें शिक्षामित्र प्रेम कुमार की गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई।
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बड़े भाई चंद्रपाल सिंह ने संबंधों में बाधक बनने पर शिक्षामित्र प्रेम कुमार की गला दबाकर हत्या करने के आरोप में उसकी पत्नी बबीता और गांव के ही रहने वाले प्रेमी पप्पू, रवि कुमार उर्फ मिंटू और वीरपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। चारों आरोपियों ने आत्महत्या दर्शाने के लिए शिक्षामित्र प्रेम कुमार के शव को रस्सी के फंदे पर लटका दिया था। पुलिस की पूछताछ में शिक्षामित्र की पत्नी बबीता रानी और अन्य आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था। इसके बाद पुलिस ने चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था। फिलहाल, सभी जमानत पर जेल से बाहर थे।

मुकदमे की सुनवाई के चलते आरोपी वीरपाल की मौत हो चुकी है। यह मुकदमा एडीजे प्रथम शाकिर हसन की अदालत में विचाराधीन था। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता रविंदर गर्ग पैरवी कर रहे थे। बुधवार को न्यायालय ने मुकदमे में आखिरी सुनवाई की। साक्ष्यों और सबूतों के आधार पर मृतक शिक्षामित्र की पत्नी बबीता रानी, पप्पू और रवि कुमार उर्फ मिंटू को दोषी करार दिया। साथ ही तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई और 14-14 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
कॉल डिटेल से खुला था राज
जिस रात शिक्षामित्र की हत्या हुई थी। उस रात उनकी पत्नी बबीता रानी के मोबाइल से देर रात तक एक नंबर पर कई बार बात की गई थी। पुलिस को शुरू से ही बबीता पर शक था। पुलिस ने उसके मोबाइल नंबर की सीडीआर निकलवाई। जिसमें उस नंबर की जांच की गई, वह नंबर आरोपी पप्पू का निकला था। पुलिस की छानबीन के दौरान यह तथ्य भी सामने आया था कि प्रेम कुमार ने अपनी पत्नी बबीता रानी को उसके प्रेमी पप्पू के साथ देख लिया था। इस बात को लेकर दोनों के बीच तकरार चल रही थी। तभी, बबीता ने अपने प्रेमी पप्पू के साथ मिलकर शिक्षामित्र प्रेम कुमार की हत्या की योजना बनाई और गांव के रहने वाले रवि कुमार उर्फ मिंटू और वीरपाल को भी शामिल कर लिया था।
बाइक और मकान के लालच ने बना दिया हत्यारा

शिक्षामित्र प्रेम कुमार की पत्नी बबीता के प्रेमी पप्पू की गांव जयतौली में गैस एजेंसी है। पप्पू ने हत्या की एवज में रवि कुमार उर्फ मिंटू को बाइक और वीरपाल का घर बनवाने का लालच दिया था। वीरपाल और मिंटू दोनों पप्पू के गहरे दोस्त हैं। पप्पू आए दिन दोनों की आर्थिक मदद भी करता रहता था। बुलेट और मकान के लालच ने मिंटू और वीरपाल को हत्यारा बना दिया।
हत्यारोपी पत्नी ने शिक्षामित्र की आत्महत्या साबित करने को लिया था पुराने सुसाइड नोट का सहारा
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता रविंद्र गर्ग ने बताया कि शिक्षामित्र प्रेम कुमार की पत्नी बबीता ने प्रेमी पप्पू के साथ मिलकर बेहद शातिराना अंदाज में हत्या की योजना बनाई थी। क्योंकि, बबीता के गांव के रहने वाले पप्पू के साथ संबंध थे, यह बात सभी परिवार वालों को पता थी। समाज में बदनामी के डर से परिवार के लोगों ने बबीता और उसके प्रेमी पप्पू को समझाया था। लेकिन, दोनों नहीं माने। बदनामी के आहत होकर हत्या के करीब दो महीने पहले शिक्षामित्र ने आत्महत्या करने की कोशिश भी की थी, लेकिन बच गए थे।
आत्महत्या करने की कोशिश करने से पहले प्रेम कुमार ने एक सुसाइड नोट भी लिखा था, जिसको शिक्षामित्र की पत्नी बबीता ने अपने पास रख लिया था। इसके बाद 28 अक्तूबर 2018 की रात बबीता ने प्रेमी पप्पू और गांव के रहने वाले रवि कुमार उर्फ मिंटू और वीरपाल के साथ मिलकर प्रेम कुमार की गला दबाकर हत्या कर दी और शव को आत्महत्या दर्शाने के लिए रस्सी पर लटका दिया था। इसके बाद उसी पुराने सुसाइड नोट को मृतक प्रेम कुमार की जेब में रख दिया था। इस दौरान शिक्षामित्र की पत्नी बबीता ने पुलिस और परिवार के लोगों को भ्रमित करने के लिए कहा था कि प्रेम कुमार शिक्षामित्र से शिक्षक बने थे, लेकिन बाद में उन्हें फिर से शिक्षामित्र बना दिया गया। जिसके चलते वह मानसिक रूप से परेशान थे और उन्होंने आत्महत्या कर ली।
शिक्षामित्र को इंसाफ दिलाने आखिर तक लड़ा दिव्यांग भाई

अपर जिला शासकीय अधिवक्ता रविंदर गर्ग ने बताया कि मृतक शिक्षामित्र प्रेम कुमार के बड़े भाई चंद्रपाल दिव्यांग हैं। घटना के समय वह दिल्ली में थे। भाई की मौत की जानकारी मिलने पर वह घर आए थे। इसके बाद उन्होंने शिक्षामित्र की पत्नी बबीता रानी और उसके प्रेमी समेत चार लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। करीब छह साल तक न्यायालय में सुनवाई चली लेकिन, शिक्षामित्र को इंसाफ दिलाने के लिए दिव्यांग भाई लड़ता रहा। वह हर तारीख पर कोर्ट में पैरवी करने आए। उनके मजबूत इरादों के चलते दोषियों को सजा मिली।
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पुलिस की सीडीआर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बने मजबूत साक्ष्य :
शिक्षामित्र हत्याकांड में पुलिस की सीडीआर व पोस्टमार्टम रिपोर्ट आरोपियों को सजा दिलाने में मजबूत साक्ष्य बने। अपर जिला शासकीय वकील रविंदर गर्ग ने बताया कि हत्याकांड में कोई मजबूत साक्ष्य व सबूत नहीं थे। लेकिन, सीडीआर व पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने ही साबित कर दिया कि शिक्षामित्र की हत्या हुई थी। घटना वाली रात चारों आरोपी एक-दूसरे के संपर्क में थे, यह बात सीडीआर से स्पष्ट हो गई थी। गांव के कुछ लोगों ने भी आरोपियों को घटना वाली रात शिक्षामित्र के घर से बाहर जाते हुए देखा था।
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