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गंगा एक्सप्रेस-वे निर्माण के संदर्भ में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने किसानों को समस्याओं को सुना

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गंगा एक्सप्रेस-वे निर्माण के संदर्भ में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम द्वारा पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए लोक सुनवाई का आयोजन किया। जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्र में सर्वे किया गया है। जिसमें पाया है कि प्रदूषण की कोई शिकायत नहीं मिली है। पेयजल को लेकर भी कोई दिककत नहीं है। इस पर एक अधिवक्ता ने आपत्ति जताई।
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बुधवार को मंडी समिति में एडीएम न्यायिक माया शंकर की अध्यक्षता में लोक सुनवाई का कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में प्रदूषण नियंत्र बोर्ड के अधिकारी ने कहा कि क्षेत्र में जांच के उपरांत यह पाया गया है कि प्रदूषण नहीं है और दौलतपुर कलां सहित अन्य गांवों में जल पीने योग्य है। इस पर क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता एवं बार के पूर्व अध्यक्ष मुजाहिद चौधरी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि तहसील हसनपुर में बगद नदी के आसपास का संपूर्ण क्षेत्र जल प्रदूषण से गंभीर रूप से ग्रस्त है। मानव जीवन सहित जीव जंतुओं, पशु पक्षियों को पीने का स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है । बगद नदी के किनारे स्थित ग्रामों में पेयजल की समस्या है। इस दौरान उन पच्चीस गांवों के किसान भी बैठक में मौजूद रहे। जिनकी जमीन गंगा एक्सप्रेस-वे में जा रही है। किसानों ने कहा कि कई गांवों में यह देखने का मिल रहा है कि जितनी जमीन का बैैनामा गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए किया गया था। उससे अधिक भूमि पर ठिया बंदी की जा रही है। जो नियम के विरुद्ध है। इस मौके पर एडीएम न्यायिक तहसीलदार अभय कुमार सिंह, नायब तहसीलदार आदि मौजूद रहे।
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