अवैध कालोनियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा चिंता जताने और अवैध निर्माण पर राज्य सरकारों को कार्य योजना तैयार करने के आदेश से गजरौला के कालोनाइजरों में हड़कंप मचा है। कारण गजरौला नगर और आसपास कम से कम दस अवैध कालोनियां हैं। हाईवे से लेकर धनौरा मार्ग तक अवैध कालोनियों का जाल बिछा है। लोगों का आरोप है कि एमडीए की मिलीभगत से अवैध कालोनियां बस रही हैं।
गजरौला राष्ट्रीय राजमार्ग-24 किनारे स्थित होने के साथ ही रेलमार्ग से जुड़ा है। हर शहर को आने जाने की सुविधा के चलते आसपास के लोग ही नहीं बल्कि दूरदराज के लोग भी गजरौला में आकर बस रहे हैं। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां पर छोटी-बड़ी कम से कम दो सौ इकाइयां हैं। जिनमें 20 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। यह भी गजरौला में देश के कोने-कोने से लोगों के आकर बस जाने का प्रमुख कारण है। विभिन्न इकाइयों में काम करने वाले लोग नगर के आसपास ही घर बना रहे हैं। उनको आवासीय सुविधा मुहैया कराने का लालच देकर कालोनाइजर अवैध कालोनियां काट रहे हैं। जिसका नतीजा यह है कि नगर के चारों ओर अवैध कालोनियां पनप रही हैं। सलारपुर के सामने हाईवे किनारे से लेकर मोहम्मदाबाद तक कालोनाइजरों ने अवैध कालोनी बसाने के लिए जमीन खरीद ली है। नगर से सटे सलेमपुर, पाल और अहरौला तेजवन मार्ग के किनारे भी अवैध कालोनियां बसाने के लिए प्लॉटिंग कर दी गई है। लोगों का आरोप है कि एमडीए की मिलीभगत से ही गजरौला में अवैध कालोनियां बस रही हैं। जिसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। उनमें मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध कालोनियों पर नाराजगी प्रकट करने और उनके खिलाफ कार्य योजना तैयार करने के आदेश के बाद कालोनाइजरों में हड़कंप मचा है।
एसडीएम अरुण कुमार का कहना है कि गजरौला में 21 अप्रैल को ही चार स्थानों पर की जा रही अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त करा दिया गया। इनपर अवैध कालोनियां बसाने की तैयारी थी। इससे पहले भी अवैध प्लाटिंग पर जेसीबी चल चुकी है। एसडीएम ने बताया कि गजरौला में कई लोग बार-बार अवैध प्लॉटिंग कर कालोनी बसाने की तैयारी करते हैं, लेकिन किसी भी कीमत पर अवैध कालोनियां नहीं बसने दी जाएंगी।