श्रीमद दयानंद कन्या गुरुकुल महाविद्यालय चोटीपुरा में चल रही लिपि रूपांतरण कार्यशाला के पांचवें दिन शारदा लिपि में लिखे ग्रंथों को देवनागरी में लिपिबद्ध करना शुरू कर दिया। बृहस्पतिवार को यह दोनों ग्रंथ पूरे हो जाएंगे। इस दौरान छात्राओं ने पांडुलिपि से संबंधित प्रधानमंत्री के वेबिनार को भी सुना।
महाविद्यालय में छात्राओं को लिपि रूपांतरण के लिए कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें छात्राएं रोजाना अलग-अलग लिपि रूपांतरण की विधियों सीख रहीं हैं। बुधवार को सारिकापद्धति व भोजनविधि नामक ग्रंथों के साथ लिपि रूपांतरण का कार्य शुरू हुआ। प्रशिक्षक भवनाथ झा ने कहा कि छात्राओं में इसके प्रति रुचि है। भारत इस ज्ञान भंडार के कारण ही विश्व गुरू बना था। गुरुकुल में राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन की ओर से आयोजित इस कार्यशाला के माध्यम से उसी ज्ञान भंडार को सुरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। छात्राओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांडुलिपि की धरोहर को सुरक्षित करने की संभावनाओं और उससे होने वाले लाभ के संबंध में आयोजित हुए वेबिनार के जरिए उनके विचारों को सुना।
बताया कि वेबिनार में ज्ञान भारतम् नाम से एक नए प्रोजेक्ट को शुरू करने पर विचार किया गया है। इसके माध्यम से जहां कहीं भी पांडुलिपियां पाई जाएंगी चाहे वे किसी संस्था अथवा निजी अधिकार में क्यों न हों। भारत सरकार अपने खर्चे पर उसका डिजिटलीकरण करेगी तथा उन्हें संरक्षित करने की आधुनिक तकनीक की सुविधा उपलब्ध कराएगी।