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18 से अधिक गांव बाढ़ से तबाह

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गांव टीकोवाली में बाढ़ के पानी में होकर गुजरतीं महिलाएं। - फोटो : GAJRAULA
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गजरौला (अमरोहा)। हरिद्वार और बिजनौर बैराज से रोजाना एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण गंगा उफान पर है। बाढ़ का पानी गंगा पार के गांवों और खेतों के साथ ही रास्तों में भरा हुआ है। इससे घबराए ग्रामीण खेतों पर जाने से घबरा रहे हैं। वहीं अधिकारी इन गांवों में जाकर वहां के हालातों का जायजा लेने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। जबकि ग्रामीण नेताओं, जनप्रतिनिधियों एवं अफसरों के आने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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शनिवार को गांव चकनवाला से गुजर रही राम गंगा पोषक नहर बाढ़ के पानी से उफान पर रही। ग्रामीण नावों में बैठकर जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। मन में यही भय रहता है कि कहीं नाव पलट न जाए। ग्रामीणों का कहना था कि क्या करें? मजबूरी है। यदि नाव में नहीं बैठेंगे तो फिर इस पार से उस पार जाएंगे कैसे? नाव के इंतजार में खड़ीं कुंती, माला देवी, हरप्यारी, रामकली आदि महिलाओं का कहना था कि गांवों में तो जरूरत की सभी चीजें नहीं मिलती हैं। इसीलिए गजरौला जाना पड़ता है। वहीं अलीनगर में रहने वाले हरी सिंह, नौबहार, सज्जन, भरते आदि ने बताया कि खेतों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। वहां कैसे जाएं। कच्ची सड़क दलदल में तब्दील हो चुकी है। यही समस्या गंगा पार स्थित शीशोवाली, जाटोवाली, ढाकोवाली, टीकोवाली समेत 18 से अधिक गांवों की है। इन गांवों के ग्रामीण गांव में नेता, सांसद, विधायक और अफसरों के आने की राह देख रहे हैं।
बच्चों को कंधे पर बैठाकर पार कर रहे पानी
गजरौला। गंगा में उफान और बाढ़ का पानी भरा से खादर के अधिकांश गांवों के लोगों की जनजीवन रुक सा गया है। गांव टीकोवाली में महिलाएं और पुरुष अपने बच्चों को सिर और कंधे पर बैठाकर बाढ़ के पानी को पार कर खेतों में चारा लेने जा रहे हैं। गांव निवासी रामभरोसे सिंह, सोनू सिंह, राम स्वरूप सिंह, ओमप्रकाश सिंह, सूरज सिंह, धर्मेंद्र सिंह, रावेंद्र सिंह, सोमिंद्र सिंह, पिंटू सिंह, गंगाशरण सिंह आदि ने अमर उजाला को बताया कि उनके खेतों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। जान जोखिम में डालकर वहां से पशुओं के लिए हरा चारा लेकर आ रहे हैं।
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कई गांवों का संपर्क कटा, झेल रहे हैं दुश्वारियां
अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला। गंगा की बाढ़ से सबसे अधिक दिक्कत गांव टीकोवाली, मंदिर वाली बुड्ढी और जहांगीरवाली बुड्ढी के ग्रामीणों को हो रही है। इन गांवों का संपर्क अन्य गांवों से कटा हुआ है। गांव में बाइक तक नहीं जा रही। ग्रामीण दलदल और पानी के बीच से गुजर ही आ-जा रहे हैं।
शनिवार को गंगा पार के गांव टीकोवाली के प्रधान नानकचंद ने अमर उजाला को फोन कर गांव के लोगों की पीड़ा बताई। कहा कि शाम ढलते ही गांव वाले घरों में कैद हो जाते हैं। उन्हें यही डर सताए रहता है कि कहीं बाढ़ का पानी बढ़कर आबादी में न घुस आए। ग्राम प्रधान ने बताया कि पिछले कई दिनों से उनके गांव का संपर्क आसपास के गांवों से कटा हुआ है। ग्रामीण जैसे गांव में ही नजरबंद होकर रह गए हैं। गांव में आने के लिए कच्ची पगडंडीनुमा सड़क ही बची है। वो भी दलदल और गड्ढों में तब्दील हो गई। ऐसे में गांव में बाइक तक नहीं आ पा रही है। ग्रामीण पैदल चलकर और पानी से गुजकर ही आ-जा रहे हैं।
गांवों में नहीं चिकित्सा के इंतजाम
गजरौला। गंगा पार बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में चिकित्सा के कोई सरकारी इंतजाम नहीं हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग दावे जरूर करता है, लेकिन गांवों में फंसे ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी को संदेह है तो इन गांवों का स्थलीय निरीक्षण करके देखे। झूठ का पर्दाफाश अवश्य हो जाएगा। गांव टीकोवाली के प्रधान नानक चंद ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायत में चार गांव शीशोवाली, टीकोवाली, मंदिर वाली बुड्ढी और जहांगीरवाली बुड्ढी आते हैं। इन चारों ही गांवों में सरकारी स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण अपंजीकृत डा. से ही दवा लेने को विवश हैं।
आज गंगा का जल स्तर बढ़ने की आशंका
गजरौला। शनिवार को गंगा का जल स्तर 15 सेंटीमीटर घटकर 199.80 गेज मीटर रिकार्ड किया गया, लेकिन शनिवार की रात 12 बजे के बाद से पूर्व में छोड़ा गया पानी यहां पहुंच जाने के कारण जल स्तर काफी बढ़ जाएगा। बाढ़ खंड के जेई प्रदीप कुमार ने बताया कि वृहस्पतिवार को गंगा का जल स्तर 200.00 गेज मीटर , शुक्रवार को 199.95 गेज मीटर और शनिवार को 199.80 गेज मीटर रिकार्ड किया गया। उन्होंने बताया कि रात में किसी भी समय पूर्व में हरिद्वार और बिजनौर बैराज से छोड़ा गया पानी यहां पहुंच जाएगा।
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