पिछले तीन महीने में यातायात पुलिस ने अवैध पार्किंग में खड़े 260 ट्रक, कंटेनर, डीसीएम और अन्य वाहनों के चालान किए हैं। बावजूद इसके गजरौला क्षेत्र में अवैध पार्किंग पर अंकुश नहीं लग सका। यही वजह है कि सोमवार को विशेष अभिसूचना शाखा में तैनात हेड कांस्टेबल जव्वाद जैदी और उनकी पत्नी उरुस जैदी की मौत हो गई जबकि उनके दोनों बेटे घायल हो गए। इसे वाहन चालकों की मनमानी कहा जाए या जिम्मेदारों की लापरवाही। गजरौला चौपला पर यातायात पुलिस के साथ सिविल पुलिस 24 घंटे मुस्तैदी रहती है जबकि परिवहन विभाग के अफसरों को अवैध पार्किंग में खड़े वाहन दिखाई ही नहीं देते हैं।
इतना ही नहीं ओवर स्पीडिंग, रॉन्ग साइड वाहन चलाने, ड्रंकन ड्राइविंग करने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है। इनकी वजह से हादसे हो रहे हैं। जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक मार्च के महीने में यातायात पुलिस ने अवैध पार्किंग में खड़े 71 वाहनों का चालान काटा था जबकि अप्रैल के महीने में यातायात पुलिस 106 वाहनों का चालान काटा गया। यह सभी वाहन गजरौला चौपला पर अवैध पार्किंग में खड़े थे। ऐसे ही मई के महीने में यातायात पुलिस ने 83 वाहनों का चालान काटा लेकिन बड़ी बात ही है कि लगातार कार्रवाई के बाद भी गजरौला के सबसे व्यस्त चौपला चौराहे पर वाहन अवैध पार्किंग का अड्डा बना हुआ है जो हर रोज हादसों का कारण बनते हैं।
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लापरवाही : 17 माह में 533 सड़क हादसे, 315 लोगों की गई जान
तमाम सख्ती के बाद के भी जिले की सड़कों पर हादसे थम नहीं रहे हैं। पिछले 17 माह में 533 सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 315 लोगों की जान गई है जबकि 404 लोग घायल हुए हैं। हादसों का मुख्य कारण गलत दिशा से चलना, ओवरटेक करना, यातायात नियमों का पालन न करना, वाहन चलाते समय शिष्टाचार की कमी, तेज गति से वाहन चलाना और मानक से अधिक सवारी बैठना माना गया है। अगर यातायात नियमों पर ध्यान देते तो शायद 315 लोगों की जान बच सकती थी।