सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 11 घंटे के भीतर प्रसव के बाद चार नवजात शिशुओं की मौत हो गई। सीएचसी में दो साल से महिला चिकित्सक की नियुक्ति नहीं होने के कारण दो प्रसव स्टाफ नर्स ने कराए और दो एक एएनएम ने कराए। मरने वाले तीन शिशुओं के परिजनों ने प्रसव के दौरान लापरवाही का आरोप लगाया है। जिससे स्वास्थ्य अफसरों में खलबली मच गई। सीएमओ ने प्रकरण की जांच करने के लिए दो सदस्यीय टीम नियुक्त कर दी है जो तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देगी।
हसनपुर क्षेत्र के गांव फतेहपुर खादर निवासी देवेंद्र ने अपनी पत्नी पूनम (22) को प्रसव पीड़ा होने पर सोमवार की सुबह 10 बजे अस्पताल में भर्ती कराया था। शाम 5 बजे पूनम ने बेटी को जन्म दिया लेकिन जन्म के पांच मिनट बाद ही नवजात बेटी की मौत हो गई। माना जा रहा है कि वह मृत ही पैदा हुई। गांव अगरौला कला निवासी सर्वेश ने अपनी पत्नी बीना (32) को सोमवार को ही दोपहर दो बजे प्रसव पीड़ा होने पर भर्ती कराया। बीना ने शाम 7:30 बजे बेटे को जन्म दिया। वहां से गंभीर हालत में बच्चे को रेफर कर दिया। रास्ते में उसकी मौत हो गई। गांव सुतारी निवासी ओमवीर ने पत्नी सविता (30) को प्रसव पीड़ा होने पर सोमवार की रात नौ बजे अस्पताल में भर्ती कराया। मंगलवार की सुबह छह बजे उसने बेटे को जन्म दिया लेकिन उसकी भी कुछ मिनट बाद ही मौत हो गई। इसके अलावा गांव झोंटना निवासी बंटी ने अपनी पत्नी रिंकी (22) को सोमवार की रात 11 बजे प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल में भर्ती कराया। रात में करीब तीन बजे रिंकी ने बेटे को जन्म दिया। आनन-फानन नवजात को गंभीर हालत में रेफर किया गया। निजी अस्पताल में उसकी भी मौत हो गई।
सीएचसी में प्रसव के बाद चार बच्चों की मौत की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य महकमे के अफसरों में खलबली मच गई। सीएमओ डॉ. राजीव सिंघल ने मौके पर पहुंच कर जांच पड़ताल शुरू कर दी। मरने वाले चार शिशुओं में से तीन के परिजनों ने अस्पताल में प्रसव के दौरान चिकित्सक व स्टाफ नर्स पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
मौके पर पहुंचकर फौरी तौर पर जांच की गई है। जिसमें सामने आया है कि चार बच्चों में से दो बच्चों की मौत प्रसव से पहले ही हो चुकी थी। दो बच्चों की मौत प्रसव के पंद्रह मिनट बाद हुई है। उनमें खून की कमी पाई गई। जांच के लिए दो सदस्यीय टीम बनाई है। टीम द्वारा जो भी रिपोर्ट दी जाएगी। उसके आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ राजीव सिंघल, सीएमओ