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Amroha News: खेती गंगा में समाई...घर छोड़ दूसरे राज्यों में करेंगे रोजगार और कमाई

Thu, 10 Sep 2026 12:56 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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गजरौला। गंगा के उफान से खादर के ग्रामीण मुसीबत की बाढ़ में घिरे हैं। खेतों से लेकर प्रमुख रास्तों तक पानी ही पानी है। यह स्थिति लगातार कई दिनों से होने के कारण जहां फसलें बर्बादी के कगार पर पहुंच गई हैं, वहीं खेतिहर मजदूरी का काम ठप है। इन हालात से जूझने वालों में से कई ने रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख किया है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब छह गांवों के 400 से अधिक लोग जा चुके हैं। इनमें से कुछ हरियाणा तो कुछ पंजाब रवाना हुए हैं तो कई राजस्थान चले गए।
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कुदैनी निवासी जिला पंचायत सदस्य धर्मपाल सिंह खड़गवंशी ने बताया कि गंगा के टापू पर बसे गांवों के ये लोग कोई बड़े काश्तकार नहीं हैं। तटबंध के किनारे खादर क्षेत्र में गन्ने के साथ लौकी, कद्दू, तोरई, लोबिया, करेला और मिर्च की खेती करते हैं। कुछ खेतिहर मजदूर भी हैं। इस बार उफनाई गंगा ने इनकी खेती चौपट कर दी। लंबे समय से पानी भरा होने के कारण गन्ना तक बर्बाद होने की स्थिति में पहुंच गया है।

मुरादपुर निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य सोनू भड़ाना ने बताया कि जो खेत नीचे हैं, वहां भी गंगा की मार का असर है। इनसे अब सही हालत में फसल निकालने की गुंजाइश नहीं बची। लिहाजा इन खेतों की फसल या मजदूरी पर निर्भर लोगों के पास बाहर जाकर रोजगार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। छोटी खेती वालों को यहां खाली बैठकर घर चलाना और बच्चों के स्कूल की फीस भरना संभव नहीं है। इसीलिए काफी लोग अलग-अलग राज्यों में चले गए हैं।
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तिगरी के सेवानिवृत लेखपाल घासी सिंह ने भी गंगा से प्रभावित इलाके से कई लोगों के दूसरे राज्यों में जाकर काम तलाशने की बात कही। बोले, ज्यादातर के सामने खेत और खेती के अलावा आय का साधन है नहीं। नजदीकी जिलों में भी फौरन कोई काम नहीं मिल सकेगा। लिहाजा पंजाब-हरियाणा जा रहे हैं, वहां फसल काटने का काम मिल जाता है। उसकी कमाई जुटाकर दिवाली पर लौटेंगे। कहा कि बिना पैसे के तो त्योहार भी पूरा नहीं होता।

चकनवाला एहतमाली की ग्राम प्रधान के पति हरपाल सिंह के मुताबिक मंगलवार को गांव के करीब 400 लोग ट्रक में सवार होकर इलाके से रवाना हुए हैं। रामगंगा पोषक नहर के पुल के पास ट्रक खड़ा किया था। इनमें से कुछ हरियाणा में फसल की कटाई करेंगे तो कुछ पंजाब में। कुछ राजस्थान जाएंगे।

जाने वालों में पान सिंह, इंद्रपाल, नेत्रपाल, देवेंद्र और प्रेमपाल सिंह ने कमाई के लिए बाहर जाना ही इकलौता रास्ता बताया था। हरपाल सिंह ने कहा कि गांव शीशोंवाली के अलावा टीकों वाली, मंदिर वाली और जहांगीर वाली गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए बाहर गए हैं।
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