वन विभाग की चार हजार बीघे से ज्यादा जमीन पर कब्जा कराने में फंसने पर धनौरा रेंजर ड्यूटी से भाग रहे हैं। वह अप्रैल तक मेडिकल अवकाश पर चले गए हैं। डीएफओ के ड्यूटी ज्वाइन करने को कहने पर आने से इंकार कर दिया। रेंजर के 17 दिसंबर से मेडिकल अवकाश लेने के कारण जहां माफिया के कब्जे में चिन्हित जमीन खाली नहीं कराई जा रही है, वहीं विभागीय कार्य नहीं हो पा रहे हैं। डीएफओ ने मुख्य वन संरक्षक (बरेली) से नए रेंजर की तैनाती को पत्र लिखा है।
अमर उजाला में जंगल की जमीन पर कब्जे की लगातार खबरें प्रकाशित हुईं थीं। दिसंबर माह के शुरुआत में आए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वीके सिन्हा ने रायवान दल्लीपुर, बस्तौरा खादर, रंपुरा खादर समेत कई स्थानों पर जाकर विभाग की जमीन पर कब्जा देखा था।
अफसरों को धनौरा तहसील क्षेत्र के गांवों में तकरीबन चार हजार बीघे जमीन पर अवैध कब्जा पाया गया था। रेंजर मोहम्मद इकबाल खां की संलिप्तता पाए जाने पर उन्होंने डीएफओ को रेंजर की चार्जशीट बनाने के साथ ही जमीन खाली कराने के निर्देश दिए थे। इधर खुद के फंसने पर तथा कार्रवाई से बचने के लिए धनौरा रेंजर 17 दिसंबर को 18 जनवरी तक मेडिकल अवकाश पर चले गए।
मेडिकल अवकाश खत्म होने पर डीएफओ मोहम्मद उमर खान ने रेंजर से ड्यूटी ज्वाइन करने को कहा, लेकिन रेंजर ने ड्यूटी ज्वाइन नहीं की, बल्कि फिर मेडिकल अवकाश ले लिया। इस बार उन्होंने तीन महीने का मेडिकल अवकाश लिया है। वह अप्रैल माह तक मेडिकल अवकाश पर रहेंगे। उन्होंने किसी को चार्ज भी नहीं सौंपा है।
डीएफओ ने मुख्य वन संरक्षक (बरेली) अरविंद कुमार गुप्ता को पत्र लिखकर दूसरे रेंजर की तैनाती कराने की मांग की है। कहा है कि धनौरा रेंजर के 17 दिसंबर से अप्रैल तक मेडिकल अवकाश पर चले जाने के कारण न तो वन विभाग की जमीन खाली कराई जा रही है और न ही माफिया पर कार्रवाई। विभागीय कार्य भी नहीं किए जा रहे हैं।
विभाग की चार हजार बीघे जमीन पर कब्जे में धनौरा रेंजर की संलिप्तता पाए जाने पर चार्जशीट बन गई है। वह कार्रवाई व जमीन खाली कराने से बचने के लिए 17 दिसंबर को 18 जनवरी तक मेडिकल पर चले गए। मेडिकल अवकाश समय खत्म होने के बाद भी ड्यूटी ज्वाइन नहीं कर रहे हैं। अब अप्रैल माह तक मेडिकल अवकाश पर चले गए। नए रेंजर की तैनाती के लिए मुख्य वन संरक्षक (बरेली) को लिखा है।-मोहम्मद उमर खान प्रभागीय वन अधिकारी।
धनौरा रेंजर के लंबे समय तक मेडिकल अवकाश पर जाने की जानकारी नहीं है। वह जाकर देखेंगे। किसी दूसरे को चार्ज दिया जाएगा। रही बात विभागीय कार्रवाई से बचने की, विभाग की जमीन पर कब्जा कराने में संलिप्तता पाई गई है तो बचना संभव नहीं है। उन पर जरूर कार्रवाई होगी। -अरविंद कुमार गुप्ता मुख्य वन संरक्षक(बरेली)।